शची माहेश्वरी (सौ. डिजाइन फोटो)
Motivational Story: कहते हैं कि अगर आपके अंदर कुछ करने का जज्बा है तो कोई भी चुनौती आपके हुनर को निखरने से नहीं रोक सकती। शची माहेश्वरी की कहानी इसी जज्बे की एक जीती-जागती मिसाल है। एक पारंपरिक परिवार से निकलकर कॉर्पोरेट जगत के शिखर तक पहुंचने और फिर वहां से एक नई राह चुनने वाली शची आज उन हज़ारों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो अपनी पहचान बनाने का सपना देखती हैं। एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार से निकलकर कॉर्पोरेट जगत में ऊंचाइयों को छूना और फिर एक सफल CFO की कुर्सी छोड़कर लीडरशिप कोच बनने का फैसला केवल वही ले सकता है जिसे अपने उद्देश्य और क्षमता पर पूरा विश्वास हो।
शची का जन्म एक पारंपरिक माहेश्वरी मारवाड़ी परिवार में हुआ। उनके पिता जो पेशे से एक प्रोफेसर थे उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। एक ऐसे दौर में जब समाज की सोच सीमित थी उनके पिता ने उन्हें अनुशासन, सिद्धांतों और सबसे महत्वपूर्ण स्वतंत्र सोच की शिक्षा दी। शची बताती हैं कि वे शुरुआती दिनों में एक औसत छात्रा थीं लेकिन जैसे ही उन्हें अपनी आंतरिक क्षमता का आभास हुआ उनकी मेहनत रंग लाने लगी। उन्होंने 10वीं, 12वीं और बीकॉम में लगातार ‘रैंकर’ बनकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
शची की शैक्षणिक यात्रा उनकी मेहनत व लगन को दर्शाती है जिस दौर में विज्ञान (Science) को करियर के लिए श्रेष्ठ माना जाता था, उनके पिता ने उनकी प्रबंधन कुशलता को भांपते हुए उन्हें कॉमर्स की राह दिखाई। पिता के भरोसे पर खरी उतरते हुए शची ने एक साथ तीन कठिन डिग्रियां हासिल कीं और CA (चार्टर्ड अकाउंटेंसी), M.Com (मास्टर्स इन कॉमर्स) और भरतनाट्यम में बी.ए. (B.A. in Dance) करने में सफल रहीं। उनकी यह उपलब्धि साधारण नहीं थी। इसके लिए वे दिन में 10-12 घंटे पढ़ाई और 4 घंटे नृत्य का कठिन अभ्यास करती थीं। यह उनके भीतर के कड़े अनुशासन का ही परिणाम था कि वे कला और अंकगणित दोनों में निपुण हो गईं। यही मेहनत करने का जज्बा उनको आगे बढ़ने में कारगर साबित हुआ। इसी के दम पर वह कभी किसी चैलेंज में फेल नहीं हुयीं।
शची माहेश्वरी की प्रेरणादायक कहानी (सौ. सोशल मीडिया)
शची ने अपने करियर की शुरुआत बड़ौदा (गुजरात) की एक सीए फर्म से की। 1999 में विवाह के बाद वे हैदराबाद आ गईं जो उनके पेशेवर जीवन के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। यहाँ उन्होंने कई मल्टीनेशनल कंपनियों और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। उन्होंने अपनी मेहनत से सैकड़ों करोड़ की कंपनी बनवाने और उसे आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और कॉर्पोरेट जगत में एक विश्वसनीय नाम बन गईं।
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शची का मानना है कि सफलता के लिए किसी बाहरी सपोर्ट सिस्टम से कहीं ज्यादा जरूरी महिला का अपना दृढ़ संकल्प होता है। वे कहती हैं “अगर आपने कुछ पाने का तय कर लिया है और अपना बेस्ट करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है।” वे अपनी सफलता का श्रेय पिता के संस्कारों, पति के अटूट सहयोग और ईश्वर की कृपा को देते हुए कहती हैं कि अगर किसी काम के प्रति आपकी सोच अच्छी है और पूरे डेडीकेशन के साथ काम किया जाता है तो नियति भी आपकी मदद के लिए तैयार हो जाती है।
सची माहेश्वरी (सौ. सोशल मीडिया)
साल 2021 में शची ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया। एक आरामदायक कुर्सी, रसूख और भारी-भरकम वेतन वाली नौकरी को छोड़कर उन्होंने लीडरशिप कोचिंग की अनिश्चित दुनिया में कदम रखने का साहस किया। इसके पीछे एक गहरा कारण था। जब वे कॉर्पोरेट में थीं तब लोग अक्सर उनके पास केवल फाइनेंस के लिए ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत समस्याओं और पीपल मैनेजमेंट की सलाह लेने आते थे। तब उन्होंने महसूस किया कि उनकी सलाह से लोगों के जीवन और कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने छुट्टी के दिनों में मेंटर के रूप में काम करना शुरू किया। जब हर तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी तो उन्हें धीरे-धीरे अंदर से यह महसूस होने लगा कि ईश्वर उन्हें किसी हायर पर्पस की ओर बुला रहा है उनको अपनी राह बदलनी चाहिए।
इतने बड़े पद को छोड़ना आसान नहीं था। शची को खुद को मानसिक रूप से तैयार करने में लगभग 3 से 4 साल लगे। कई शुभचिंतकों ने इसे गलत निर्णय भी कहा लेकिन शची का मानना था कि वे अपने जीवन के अगले 15-20 साल उस काम को देना चाहती हैं, जिससे उन्हें सच्चा संतोष मिल सकता है। अंततः 31 मार्च 2021 को उन्होंने अपनी पुरानी भूमिका को अलविदा कह दिया और नयी राह पर चलने का ऐलान किया।
शची माहेश्वरी की कहानी केवल करियर की सफलता की कहानी नहीं है बल्कि यह आत्मविश्वास, साहस और उद्देश्य की कहानी है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर जुनून है तो आप पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर अपनी नई पहचान बना सकते हैं। उनकी पहल यही संदेश देती है कि “अगर आप अपने उद्देश्य को पहचान लें और उसके लिए समर्पित हो जाएं तो सफलता पक्की है। लेकिन जीवन में खुशी सिर्फ सफलता, पद और पैसे में नहीं बल्कि दूसरों के जीवन में बदलाव लाने से भी मिलती है।”
शची माहेश्वरी (सौ. सोशल मीडिया)
आज शची माहेश्वरी एक Executive & Leadership Coach के रूप में बिजनेस ओनर्स, सीईओ और सीएफओ को प्रशिक्षित कर रही हैं। उनकी कोचिंग किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि उनके वर्षों के प्रायोगिक ज्ञान पर आधारित है। वे सिखाती हैं कि आप अपने कार्पोरेट करियर और लीडरशिप के हुनर को कम से कम समय में कैसे निखारें और कैसे अपनी सोच के अनुरुप काम करके आगे बढ़ें। इसके लिए उनका फोकस इन 3 बातों पर होता है….
शची अब अपने इस ज्ञान को और अधिक लोगों तक पहुँचाना चाहती हैं। वे अपने लेख, वीडियो और वर्कशॉप्स के जरिए कॉर्पोरेट जगत की समस्याओं का सीधा समाधान प्रदान कर रही हैं। इसके साथ-साथ देश भर के बिजनेस ओनर्स के लिए वर्कशॉप्स आयोजित कर रही हैं ताकि भारत के व्यापारिक जगत को बेहतर और सशक्त नेतृत्व मिल सके और लोग अपने सपने साकार कर सकें।
इस तरह से देखा जाए तो शची माहेश्वरी की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सफलता केवल ऊंचे पदों और पैसों तक सीमित नहीं है बल्कि असली सफलता वह है जब आप अपने हुनर से दूसरों के जीवन में बदलाव ला सकें। वह फिलहाल इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही हैं और कोशिश है कि वह एक-दो नहीं बल्कि हजारों-लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला सकें।