IIT पटना और खड़गपुर में आधे से ज्यादा पद खाली, क्या संकट में है 1.35 लाख छात्रों का भविष्य?
IIT Faculty Vacancy: देश के 23 IIT संस्थानों में फैकल्टी के 4,804 पद रिक्त हैं। IIT पटना और खड़गपुर की स्थिति सर्वाधिक चिंताजनक है, जहां स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक शिक्षकों की कमी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो (सो. AI)
IIT Faculty Vacancy Crisis: भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश भर के 23 आईआईटी संस्थानों में फैकल्टी के पदों पर बड़े पैमाने पर रिक्तियां हैं, जो न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बल्कि शोध कार्यों को भी प्रभावित कर रही हैं।
पटना और खड़गपुर की स्थिति सबसे खराब
आईआईटी काउंसिल के डेटा और सरकारी रिकॉर्ड के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के इन प्रीमियम संस्थानों में स्वीकृत 12,498 फैकल्टी पदों में से 4,804 पद खाली हैं। इसका अर्थ है कि हर पांच में से दो पद रिक्त हैं। आंकड़ों के मुताबिक, आईआईटी पटना में सबसे ज्यादा 54.6% पद खाली हैं, जबकि आईआईटी खड़गपुर में यह आंकड़ा 51.3% है। इसके अलावा, आईआईटी धनबाद (48.4%) और आईआईटी गोवा (45.8%) में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
देश के पुराने और शीर्ष संस्थानों जैसे आईआईटी कानपुर (39%), आईआईटी बॉम्बे (38.4%), और आईआईटी दिल्ली (38.3%) में भी फैकल्टी की भारी कमी देखी जा रही है। हालांकि, धारवाड़ और पालक्कड़ जैसे नए आईआईटी इस मामले में काफी बेहतर स्थिति में हैं, जहां रिक्तियां क्रमशः केवल 1% और 5% हैं।
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आखिर क्यों खाली रह जाते हैं ये पद?
आईआईटी के निदेशकों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में टॉप पीएचडी होल्डर्स के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज, बड़ी टेक कंपनियां और डीप-टेक स्टार्टअप्स इन प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को बेहद आकर्षक सैलरी और पदों पर नौकरी दे रहे हैं, जिससे आईआईटी के लिए उन्हें आकर्षित करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, आईआईटी में चयन प्रक्रिया के मानक भी बेहद सख्त हैं। संस्थान गुणवत्ता से समझौता करने के बजाय पदों को खाली रखना बेहतर समझते हैं। AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते हुए विषयों में योग्य शिक्षकों की वैश्विक स्तर पर भारी कमी है।
रिसर्च और रिजर्वेशन पर गहरा प्रभाव
वर्तमान में देश के आईआईटी संस्थानों में 1.35 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं। शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों के मार्गदर्शन और शोध कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेष रूप से आरक्षित श्रेणियों की रिक्तियों का आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। 9 आईआईटी द्वारा साझा किए गए डेटा के अनुसार, एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित लगभग 1,501 रिक्तियों में से 60% पद अभी भी भरे जाने बाकी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा कमी ओबीसी (477) श्रेणी में है।
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भर्ती के लिए जारी हैं मिशन मोड प्रयास
शिक्षा मंत्रालय और आईआईटी प्रबंधन लगातार इन रिक्तियों को भरने की कोशिश कर रहे हैं। कई संस्थानों ने ‘रोलिंग एडवरटाइजमेंट’ और ‘मिशन मोड हायरिंग’ जैसे कदम उठाए हैं। जिसके बाद से आईआईटी खड़गपुर ने अक्टूबर 2025 से अब तक 215 से ज्यादा फैकल्टी नियुक्तियां पूरी की हैं।
