आधा जुलाई बीता फिर भी नहीं हुआ एडमिशन, 11वीं की प्रवेश प्रक्रिया ने बढ़ाई टेंशन
आधा जुलाई बीत जाने के बाद भी महाराष्ट्र में 11वीं कक्षा में केवल पहले राउंड के ही प्रवेश हुए हैं। प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी ने छात्रों के साथ-साथ पालकों की भी टेंशन बढ़ा दी है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
नागपुर: शिक्षा विभाग ने इस बार 11वीं की प्रवेश प्रक्रिया जल्द पूरी कर अगस्त से नियमित क्लासेस का लक्ष्य रखा था। इसके लिए पूरे राज्य के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया लागू की गई लेकिन शुरुआत से ही तकनीकी खामियों ने पीछा नहीं छोड़ा है। आधा जुलाई बीत जाने के बाद भी केवल पहले राउंड के ही प्रवेश हुए हैं। प्रक्रिया पूरी होने तक अगस्त भी बीतने की उम्मीद है। देरी ने छात्रों सहित पालकों की भी टेंशन बढ़ा दी है।
10वीं के रिजल्ट की घोषणा के बाद 11वीं के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया 19 मई से शुरू हुई। वास्तविक पंजीकरण 21 मई से शुरू होना था लेकिन शिक्षा विभाग की वेबसाइट पहले ही दिन क्रैश हो गई और प्रक्रिया बाधित हो गई। बाद में 26 मई से फिर से पंजीकरण शुरू किया गया। 3 जून तक की समयसीमा बाद में 5 जून और फिर 8 जून तक बढ़ा दी गई थी।
कॉलेज कोटे के प्रवेश 11 और 12 जून को लिए गए। सामान्य प्रवेश 14 जून से शुरू होना था लेकिन फिर से तकनीकी खामियों के चलते विभाग ने प्रक्रिया को 10-12 दिनों के लिए स्थगित कर दिया। 28 जून को सूची घोषित की गई और 30 जून से पहले राउंड के प्रवेश शुरू हुए।
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सेकंड राउंड में कौन सा मिलेगा कॉलेज
पहले राउंड में 22,574 पंजीकृत छात्रों का प्रवेश पूरा हुआ। नागपुर जिले में कुल 97,435 सीटें हैं जिनके लिए 42 हजार छात्रों ने पंजीकरण कराया है। सबसे अधिक टेंशन विज्ञान शाखा में प्रवेश का इंतजार कर रहे छात्रों को है।
नागपुर जिले में विज्ञान शाखा में 49 हजार सीटें हैं। इनमें से अब तक 13 हजार छात्रों ने प्रवेश लिया है। 85 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाले अधिकांश छात्रों को पहले राउंड में प्रवेश नहीं मिला है। अब अगले राउंड में कौन सा कॉलेज मिलता है, यह छात्रों की चिंता का विषय है।
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बिना तैयारी सरकार ने लिया निर्णय
दरअसल, स्कूल चालकों से लेकर शिक्षक तक ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के विरोध में थे लेकिन राज्य सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने किसी की आपत्ति पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके विपरीत महानगर पालिका सीमा के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में पहले से चल रहे ऑनलाइन प्रवेश इस वर्ष पूरे राज्य में लागू कर दिए गए।
सरकार ने यह अध्ययन भी नहीं किया कि तकनीकी व्यवस्था को संभालने की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं या नहीं। इस गैरजिम्मेदारी का खामियाजा अब छात्र और अभिभावक भुगत रहे हैं। कॉलेज जुलाई में शुरू होने थे लेकिन इस हालत में अब अगस्त पूरा निकलने के आसार हैं।
