छत्रपति संभाजीनगर से यवतमाल भेजे जा रहे 1040 बैग नकली खाद जब्त, कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार पर मामला दर्ज
Fake Fertilizer Seized in Chhatrapati Sambhajinagar: कृषि विभाग ने यवतमाल भेजे जा रहे 1040 नकली खाद का बैग जब्त किए। ई-वे बिल न मिलने और फर्जी ब्रांडिंग का खुलासा होने पर हुआ मामला दर्ज।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
जब्त नकली खाद का बैग (सोर्सः फाइल फोटो)
Sambhajinagar Agriculture Department Seized Fake Fertilizer: किसानों को नकली खाद बेचकर धोखाधड़ी करने की एक बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए कृषि विभाग के विशेष उड़न दस्ते ने 1040 बैग संदिग्ध खाद जब्त किया है। यह कार्रवाई 15 जून की रात धुले-सोलापुर राजमार्ग पर गांधेली क्षेत्र में की गई। जब्त खाद यवतमाल जिले के उमरखेड और फुलसावंगी क्षेत्र में बिक्री के लिए भेजा जा रहा था।
मामले में चार लोगों के खिलाफ चिकलथाना पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गुप्त सूचना मिलने के बाद उड़न दस्ते ने ट्रक क्रमांक एमएच 28 बीबी 9899 को रोककर उसकी जांच की। प्रारंभिक जांच में ट्रक में बड़ी मात्रा में खाद के बैग पाए गए, जिनमें विभिन्न कंपनियों के नाम अंकित थे। अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं दिखाई दीं, जिसके बाद पूरे माल को जब्त कर आगे की जांच शुरू की गई।
अधिकारियों को कैसे हुआ संदेह!
कृषि विभाग के सह संचालक कार्यालय के अधिकारी आशीष कालुशे की शिकायत के अनुसार, ट्रक चालक राजेंद्र नागरे से माल से संबंधित दस्तावेज मांगे गए। चालक केवल तीन डिलीवरी चालान ही प्रस्तुत कर सका, जबकि माल के परिवहन के लिए आवश्यक ई-वे बिल उपलब्ध नहीं करा पाया। पूछताछ में चालक ने बताया कि खाद का माल हडपसर स्थित आर.आर. एग्रो फर्टिलाइजर तथा कृषि गौरव फर्टिलाइजर से लोड किया गया था।
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दस्तावेजों और माल में असंगति मिलने के बाद अधिकारियों का संदेह और गहरा गया। इसके बाद संबंधित कंपनियों और निर्माताओं से संपर्क कर माल की सत्यता की जांच शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि यदि परिवहन और बिक्री से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हों तो ऐसे मामलों में फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ जाती है।
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कैसे किसानों और शासन से हो रही हैं धोखाधड़ी!
जांच के दौरान सोलापुर स्थित मोहिनी एग्रो टेक कंपनी से संपर्क किया गया। कंपनी ने स्पष्ट रूप से बताया कि जब्त किया गया खाद उनकी कंपनी में तैयार नहीं किया गया है और उसका उनकी उत्पादन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। इसके बाद की गई गुणवत्ता जांच में सामने आया कि अनुदानित खाद में अवैध रूप से मिश्रण किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों से किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचता है और फसलों की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान व्यवस्था का भी दुरुपयोग होता है। कृषि विभाग ने इसे किसानों और शासन दोनों के साथ गंभीर धोखाधड़ी माना है। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक उत्तम संभाजी नागरगोजे कर रहे हैं तथा पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
