Explainer: क्या है मनी म्यूल स्कैम, गरीबों के बैंक खाते से कैसे हो रहा करोड़ों का फ्रॉड? आसान भाषा में समझें

Money Mule Scam: वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज मामलों में अब तक 17,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
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मनी म्यूल स्कैम क्या है? (AI जेनरेटेड इमेज)
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Money Mule Scam Explained: भारत में जैसे-जैसे डिजिटल युग का विस्तार हुआ है, वैसे ही साइबर क्राइम से जुड़े मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की क्राइम इन इंडिया 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में साइबर अपराध के मामले 17% तक बढ़ गए हैं। एक साल यानी की सिर्फ 2024 में कुल 1, 01,918 मामले दर्ज हुए थे, जिसमें से लगभग 72.6% मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े हुए थे। ये आकंड़े इस बात के संकते हैं कि देश में डिजिटल सुरक्षा की चुनौतियां तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर आए दिन खबर मिलती हैं कि डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों से लाखों और करोड़ों की ठगी की जा रही है। कई लोगों ने तो अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट, तो कई लोगों ने अपने गहने बेचकर अपराधियों को पैसे देने पर मजूबर हो गए हैं। रॉकेट की रफ्तार से बढ़ती डिजिटल दुनिया में आज कई तरह के स्कैम आ गए हैं, जिनके जरिए ठग लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। मनी म्यूल स्कैम भी उनमें से एक है। यह क्या है और लोग कैसे इसका शिकार हो रहे हैं? आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए आसान भाषा में समझते हैं।

मनी म्यूल स्कैम क्या है?

मनी म्यूल स्कैम एक ऐसा खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए ब्लैक मनी या साइबर क्राइम के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किसी तीसरे पक्ष के बैंक अकाउंट को इस्तेमाल करते हैं। इस काम के लिए ठग अक्सर मासूम लोगों को जैसे कि सीधे-सादे ग्रामीणों, गरीबों, मजदूरों या पार्ट-टाइम नौकरी की तलाश कर रहे छात्रों को अपना निशाना बनाते हैं। इस काम के लिए ठग उन्हें कुछ पैसे कमीशन या बैंक अकाउंट रेंट पर देने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, चेकबुक और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स अपने कब्जे में ले लेते हैं।

इसके बाद साइबर अपराधी देश भर से ठगे गए करोड़ों रुपये इन खातों में ट्रांसफर करते हैं और पलक झपकते ही कैश निकाल कर गायब हो जाते हैं। जब पुलिस या जांच एजेंसियां जांच शुरू करती हैं, तो डिजिटल ट्रेल के आधार पर वे सीधे इन मासूम खाताधारकों तक पहुंचती हैं, जिन्होंने अनजाने में अपना खाता अपराधियों को सौंप दिया था। इस तरह मुख्य आरोपी तो कानून की गिरफ्त से दूर रहते हैं, लेकिन ये गरीब लोग मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध के संगीन मामलों में फंसकर जेल पहुंच जाते हैं, जिससे बचने के लिए बैंकिंग सुरक्षा और जागरूकता ही एकमात्र उपाय है।

लोग कैसे होते हैं ठगों का शिकार?

सेटअप: स्कैमर फर्जी नौकरी का विज्ञापन, रोमांस स्कैम या सोशल मीडिया के जरिए लोगों के संपर्क में आते हैं। इसके बाद वे कम मेहनत में आसानी से पैसे कमाने का ऑफर देते हैं।

फंड लेना: ठग गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए पैसे जैसे कि- फिशिंग, रोमांस स्कैम या आइडेंटिटी थेफ्ट से शिकार लोगों के पैसे बैंक अकाउंट में जमा कर देते हैं।

फंड ट्रांसफर करना: शिकार को पैसे ट्रांसफर करने, निकालने या बदलने (अक्सर क्रिप्टोकरेंसी या गिफ्ट कार्ड में) और कहीं और भेजने के लिए कहा जाता है।

कमीशन: इसे असली दिखाने के लिए, स्कैमर म्यूल (वह इंसान जो इन पैसे की लेनदेन के लिए अपने खाते का इस्तेमाल कर रहा है) से कहता है कि वे ट्रांसफर के इनाम के तौर पर एक छोटा सा हिस्सा (जैसे, 5 या 10%) अपने पास रख सकते हैं।

27.3 लाख मनी म्यूल बैंक खाते की पहचान

भारत में मनी म्यूल खातों और उनसे जुड़े साइबर घोटालों में हाल के वर्षों में भारी उछाल आया है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार, सितंबर 2024 के बाद से देश में 27.3 लाख (2.73 मिलियन) से अधिक संदिग्ध मनी म्यूल बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। I4C और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा हरियाणा का नूह जिला और झारखंड का जामताड़ा को मनी म्यूल गतिविधि के लिए हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में प्रमुख रूप से चिह्नित किया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी ऐसे मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

13 खातों के जरिए 398 करोड़ का हेराफेरी

वित्त मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज मामलों में अब तक ₹17,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। हाल ही में गुजरात के पाटन में पकड़े गए एक बड़े मामले (ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0) में केवल 13 खातों के जरिए ₹398 करोड़ से अधिक का हेरफेर किया गया। भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबकि, बैंकिंग सिस्टम में होने वाले कुल फ्रॉड में सालाना ₹48,000 करोड़ से ज्यादा के मामले सामने आए हैं, जिसमें मनी म्यूल एक बहुत बड़ा माध्यम है ।

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