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Explainer: काला धन के खिलाफ सरकार सख्त, क्या है FAST-DS नियम; जिससे विदेशों में जमा पैसे आएंगे वापस?
- Written By: मनोज आर्या
FAST-DS Scheme 2026: 1 जलाई, 2026 से सरकार फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम (FAST-DS) लागू करने जा रही है। इस नए स्कीम के तहत लोगों को 31 दिसंबर 2026 तक कुल छह महीने का समय मिलेगा।

FAST-DS क्या है? ( AI जेनरेटेड इमेज)
What Is FAST-DS 2026 Scheme: भारत में रहने वाले लोगों के ऊपर सरकार करीब से नजर तो रखती ही है, लेकिन उनकी प्रॉपर्टी पर भी कड़ी नजर है। ने सिर्फ भारत में बल्कि देश के विदेशों में संपत्ति रखने वालों पर भी सरकार पूरी नजर रखती है। भारत के बाहर प्रॉपर्टी रखने और जमा करने वाले लगों अब संपत्ति से संबंधित पूरी जानकारी देनी होगी। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसके पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
बता दें कि 1 जलाई, 2026 से सरकार फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम (FAST-DS) लागू करने जा रही है। इस नए स्कीम के तहत लोगों को 31 दिसंबर 2026 तक कुल छह महीने का समय मिलेगा, जिसमें उन्हें अपनी विदेशों में मौजूद प्रॉपर्टी और इनकम के बारे में जानकारी देनी होगी, जिन्हे पहले आयकर रिटर्न में नहीं बताया गया था। अगर इन छह महीनों में ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्या FAST-DS 2026 स्कीम?
FAST-DS 2026 छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक फॉरेन एसेट्स डिस्क्लोजर स्कीम 2026 है। इसे फाइनेंस बिल, 2026 के क्लॉज 114-128 के जरिए लाया गया था और यह योग्य टैक्सपेयर्स को फॉरेन एसेट्स या फॉरेन इनकम का खुलासा करने के लिए एक बार, 6 महीने का वॉलंटरी विंडो देता है, जिस पर या तो कभी टैक्स नहीं लगाया गया या इनकम टैक्स रिटर्न में रिपोर्ट नहीं किया गया।वैध डिस्क्लोजर और बताए गए टैक्स या फीस के पेमेंट पर, टैक्सपेयर को ब्लैक मनी एक्ट (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 के अनुसार पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन से पूरी कानूनी इम्युनिटी मिलती है। यह इम्युनिटी ऑटोमैटिक है, अपनी मर्जी से नहीं, जो पेमेंट होने के बाद कानून के ऑपरेशन से मिलती है।
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यह स्कीम खास तौर पर छोटे और असली मामलों पर टारगेटेड है, जैसे कि अनजाने में हुई चूक, लीगेसी नॉन-डिस्क्लोजर और ESOP/RSU रिपोर्टिंग गैप और यह बड़े पैमाने पर ऑफशोर टैक्स चोरी या किसी भी क्रिमिनल कार्रवाई पर लागू नहीं होती है। यह स्कीम उस तारीख से लागू होगी जिसे केंद्र सरकार ऑफिशियल गैजेट डिक्लेरेशन के जरिए नोटिफाई करेगी।
छोटे टैक्सपेयर्स पर सरकार की नजर
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये योजना खास तौर पर मध्यम वर्ग और छोटे करदाताओं के लिए लाई गई है। इसमें विदेशी कंपनियों के एम्प्लॉई स्टॉक ओनरशिप प्लान (ESOP) रखने वाले आईटी प्रोफेशनल्स, विदेश से लौटे NRI और विदेश में पढ़ाई के दौरान बैंक अकाउंट या छोटी संपत्ति रखने वाले छात्र शामिल हैं। इस स्कीम को दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। पहली कैटेगरी में 1 करोड़ रुपये तक की अघोषित फॉरेन एसेट्स और इनकम को शामिल रहेंगे।
इन संपत्तियों और आय की जानकारी देने पर मार्केट वैल्यू का 60 फीसदी टैक्स जमा करना होगा। वहीं, दूसरी कैटेगरी में 5 करोड़ रुपये तक की विदेशी संपत्तियों के शामिल करने का प्रावधान है, जिनकी इनकम भारत में दिखाकर टैक्स चुका दिया गया था, लेकिन विदेशी संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न के Schedule FA में नहीं दी गई थी। ऐसे मामलों में केवल एक बार 1 लाख रुपये का फीस चुकाना होगा।
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यह नियम क्यों जरूरी?
इस स्कीम को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि लोगों को ब्लैक मनी एक्ट के तहत लगने वाले भारी जुर्माने से बचाना है। सरकार द्वारा तय डेडलाइन के अंदर जो लोग अपनी विदेशी संपत्तियों के बारे में ही जानकारी देंगे उनके खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट के तहत जुर्माने और आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। यह योजना उनलोगों के लिए काफी खास है, जो आईटी प्रोफेशनल हैं और विदेश से भारत लौटे हैं। सरकार द्वारा शुरू किया गया यह स्कीम उनके लिए अपने पुराने रिकॉर्ड को ठिक करने का सबसे बेहतरीन मौका है।
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