वोडाफोन-आइडिया को मिली बड़ी राहत (सोर्स-सोशल मीडिया)
Vodafone Idea AGR dues repayment: भारी कर्ज के संकट से जूझ रही दिग्गज टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vi) के लिए शुक्रवार की सुबह एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने कंपनी के एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक सूचना जारी की है। इस फैसले के तहत कंपनी के भारी-भरकम बकाये को फ्रीज कर दिया गया है और भुगतान के लिए एक लंबी अवधि का रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार के इस सकारात्मक कदम से निवेशकों में उत्साह बढ़ गया है, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयरों में 8 प्रतिशत से अधिक की जबरदस्त तेजी देखी गई।
सरकार की ओर से राहत की खबर मिलते ही शेयर बाजार में वोडाफोन-आइडिया के स्टॉक ने लंबी छलांग लगाई और यह 8.2% बढ़कर ₹12.44 पर पहुंच गया। एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने स्पष्ट किया कि उन्हें दूरसंचार विभाग से एजीआर बकाये के भुगतान को लेकर आधिकारिक दिशानिर्देश मिल गए हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस स्पष्टता से कंपनी की वित्तीय अस्थिरता कम होगी और भविष्य की योजनाओं को गति मिलेगी।
एजीआर बकाये के भुगतान को तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है ताकि कंपनी पर अचानक वित्तीय बोझ न पड़े। पहले चरण में मार्च 2026 से 2031 तक कंपनी को प्रति वर्ष अधिकतम ₹124 करोड़ का मामूली भुगतान करना होगा। इसके बाद दूसरे चरण में अगले चार वर्षों तक सालाना ₹100 करोड़ का भुगतान तय किया गया है, जो कंपनी के कैश फ्लो को संभालने में मदद करेगा।
तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण के तहत शेष बची हुई विशाल एजीआर राशि का भुगतान मार्च 2036 से मार्च 2041 के बीच किया जाएगा। इस अवधि के दौरान कुल बकाया राशि को समान वार्षिक किस्तों में बांटा गया है, जिससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। इस राशि में मूलधन के साथ-साथ ब्याज, पेनल्टी और पेनल्टी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया गया है।
सरकार ने दिसंबर के अंत में ही घोषणा कर दी थी कि कंपनी के कुल ₹97,695 करोड़ के बकाये को फ्रीज कर दिया जाएगा। कंपनी को 5 साल का मोरेटोरियम पीरियड दिया गया है, जिसके बाद ही वास्तविक भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और वोडाफोन-आइडिया को अपनी 5G सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक समय और संसाधन मिल सकेंगे।
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वोडाफोन-आइडिया के निवेशकों के लिए यह खबर एक बूस्टर डोज की तरह काम कर रही है क्योंकि कंपनी की अस्तित्व को लेकर चल रही अनिश्चितता अब कम हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह सहयोग न केवल कंपनी को दिवालिया होने से बचाएगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी बेहतर विकल्प मिलते रहेंगे। हालांकि, लंबी अवधि में कंपनी की लाभप्रदता और ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी ही इसकी वास्तविक सफलता तय करेगी।