शेयर बाजार (सोर्स- सोशल मीडिया)
Global Cues Affect Indian Market: आज शुक्रवार को शेयर बाजार की शुरुआत निवेशकों के लिए काफी निराशाजनक रही और बाजार खुलते ही लाल निशान में चला गया। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे खराब संकेतों ने दलाल स्ट्रीट पर भी दबाव बना दिया जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गए। वैश्विक संकेतों के भारतीय बाजार पर असर की वजह से शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दौर शुरू हो गया और कई दिग्गज कंपनियों के बड़े स्टॉक्स धड़ाम हो गए। आम निवेशकों के लिए यह दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा क्योंकि मुनाफ़ावसूली ने बाजार की रफ़्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है जिससे चिंता बढ़ गई है।
आज के कारोबारी दिन में सेंसेक्स 308 अंक टूटकर 81940 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी भी 96 अंक गिरकर 25399 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत 82220 के मामूली घाटे के साथ हुई थी लेकिन देखते ही देखते गिरावट और अधिक गहराती चली गई जिससे बाजार में काफी हलचल रही। सुबह 9:50 बजे के करीब सेंसेक्स 377 अंक के नुकसान के साथ 82871 पर था और निफ्टी 144 अंक नीचे 25352 के महत्वपूर्ण स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
बाजार में आज की गिरावट का मुख्य कारण अल्ट्राटेक, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, मारुति, एयरटेल और बजाज फिनसर्व जैसे बड़े शेयरों में आई भारी कमजोरी रही है। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण सूचकांक ऊपर संभलने में नाकाम रहे और निवेशकों का सेंटीमेंट भी सुबह से ही काफी ढीला नजर आया। आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी दबाव साफ देखा जा रहा है जिससे आम लोगों के पोर्टफोलियो में लाल निशान और घाटा बढ़ता ही जा रहा है।
अमेरिकी बाजारों में कल रात हुई भारी गिरावट का असर आज भारतीय बाजार पर साफ नजर आया जहां टेक शेयरों में जमकर बिकवाली का दौर देखा गया। नैस्डैक कंपोजिट में 1.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि एनवीडिया और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर भी कल काफी नीचे बंद हुए थे। एशियाई बाजारों में भी जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं जिससे भारतीय निवेशकों में भी घबराहट का माहौल बना हुआ है।
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अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में प्रगति की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी और स्थिरता देखी गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.35 प्रतिशत गिरकर 70.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है जबकि यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड भी 0.32 प्रतिशत गिरकर नीचे आया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की गिरती कीमतें भारत के लिए राहत दे सकती हैं लेकिन फिलहाल बाजार की नजर सिर्फ वैश्विक तनाव पर ही है।