PNB, HDFC समेत इन बैंकों के सस्ते हुए लोन, रेपो रेट कम होने से किसे मिलेगा ज्यादा फायदा
आरबीआई के इस फैसले के बाद नए कर्जदारों के मुकाबले पुराने कर्जदारों को अधिक लाभ मिल सकता है। ऐसा इसलिए कि बैंक होम लोन पर जो एक्स्ट्रा चार्ज लेते हैं, उसमें बदलाव कर सकते हैं।
- Written By: मनोज आर्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा ऐलान करते हुए रेपो रेट में आधा प्रतिशत यानी की 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इसके बाद अब बैंक भी लोन देने की ब्याज दरें (लेंडिंग रेट्स) कम कर रहे हैं। फिलहाल ऐसा करने में सरकारी बैंक सबसे आगे नजर आ रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि आरबीआई के इस फैसले के बाद नए कर्जदारों के मुकाबले पुराने कर्जदारों को अधिक लाभ मिल सकता है। ऐसा इसलिए कि बैंक होम लोन पर जो एक्स्ट्रा चार्ज लेते हैं, उसमें बदलाव कर सकते हैं। पहले से ही मार्केट में हिस्सा बढ़ाने की रेस में ये रेट काफी कम थीं। आइए जानतें हैं कि किस बैंक ने क्या नया बदलाव किया?
बैंक ऑफ बड़ौदाः इस बैंक ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिन रेट यानी की (RLLR) में 0.50 प्रतिशत की कटौती की है, जिसे बैंक द्वारा 7 जून से ही लागू कर दिया गया है। अब इसकी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट 8.15 प्रतिशत है।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB): आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती करने की घोषणा के बाद पब्लिक सेक्टर की बैंक पीएनबी ने अपनी RLLR को आधा प्रतिशत घटाकर 8.35 प्रतिशत कर दी है। बैंक ने यह भी जानकारी दी है कि इसे 9 जून से लागू कर दिया जाएगा। हालांकि, पीएनबी ने अपनी एमसीएलआर (MCLR) रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
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बैंक ऑफ इंडिया: अन्य बैंकों की तरह बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने भी अपनी रेपो-आधारित लेंडिग रेट में 0.50 प्रतिशत की कटौती करके उसे 8.35 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने इस बदलाव को 6 जून से ही लागू कर दिया है।
यूको बैंक: इस बैंक ने (RLLR और MCLR)में कटौती की है। आरएलएलआर आधा प्रतिशत घटाकर 8.30 प्रतिशत कर दिया गया है, जो कि 9 जून से लागू होगा। एमसीएलआर में सभी अवधियों के लिए ) 0.10 प्रतिशत ( 10 बेसिस पॉइंट्स) की कमी की है। अब उसका MCLR 9 प्रतिशत है।
एचडीएफसी बैंक: इस बैंक ने 7 जून से ही अपनी MCLR में सभी अवधियों के लिए 0.10 प्रतिशत की कटौती की है। अब उसकी ओवरनाइट और एक महीने की दरें 8.9 प्रतिशत हैं।
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पुराने कर्जदारों को कैसे ज्यादा फायदा?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार बदलती दर (फ्लोटिंग रेट) वाले लोन की रेट को रेपो रेट के अनुसार खुद ही एडजस्ट करना होता है। जैसे की जिन लोगों का पहले से लोन चल रहा है (खासकर जो RLLR/EBLR से जुड़े हैं), उनकी ब्याज दर और ईएमआई खुद-ब-खुद कम हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट में छपी रिपोर्ट की माने तो नए कर्ज लेने वालों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल सकता। क्योंकि बैंक अपना मुनाफा बचाने के लिए रेपो रेट के ऊपर जो अतिरिक्त चार्ज (स्प्रेड) लगाते हैं, उसे बढ़ा सकते हैं।
