शेयर बाजार (सोर्स-सोशल मीडिया)
Share Market Performance 7 January: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और बुधवार, 7 जनवरी को सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान पर खुले, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
शुरुआती कारोबार में ही बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली ने बाजार पर दबाव को और अधिक गहरा कर दिया है।
बुधवार सुबह बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स इंडेक्स 442.94 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 84,620.40 अंक पर आ गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 35.60 अंक फिसलकर 26,143.10 के स्तर पर ओपन हुआ और देखते ही देखते 26,117 के नीचे चला गया। शुरुआती मिनटों में ही बाजार की चाल सुस्त नजर आई और प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर दिखाई दिया।
बाजार की इस गिरावट में HDFC बैंक, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल और एनटीपीसी जैसे बड़े नाम टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे, जिससे इंडेक्स पर भार बढ़ा। हालांकि, इस दबाव के बीच भी टाइटन, एचसीएल टेक और रिलायंस जैसे शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाने की कोशिश की और खरीदारी की मदद से सहारा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में चल रही अस्थिरता ने ही निफ्टी बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
मंगलवार 6 जनवरी को भी भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखी गई थी, जहां सेंसेक्स 376 अंक और निफ्टी करीब 71 अंक गिरकर बंद हुए थे। उस दिन ट्रेंट और आईटीसी जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि ICICI बैंक और टीसीएस जैसे शेयरों ने थोड़ा सुधार दिखाया था। लगातार दो दिनों की इस गिरावट ने यह संकेत दिया है कि फिलहाल बाजार में बुल्स (Bulls) की पकड़ कमजोर पड़ रही है।
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वर्तमान में निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट का रुख है, जो यह दर्शाता है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। BSC बास्केट के अधिकांश शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों को पोर्टफोलियो में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाजार की दिशा अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख और आगामी तिमाही नतीजों की उम्मीदों पर काफी हद तक टिकी हुई है।