शेयर निवेशक बेहाल, सरकार मालामाल! STT से खजाने में आए 50,000 करोड़ रुपये
Share Market: निवेशकों का कहना है कि सरकार की बेतुकी नीतियों के कारण घरेलू शेयर बाजार घोर मंदी से त्रस्त है। दुनिया भर के बाजार नई ऊंचाइयां छू रहे हैं, लेकिन भारत का शेयर बाजार घोर मंदी से जूझ रहा है।
- Written By: मनोज आर्या
शेयर मार्केट, (डिजाइन फोटो/ नवभारत)
Government Collected Rs 50,000 Crore From STT: भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक साल से भले ही मंदी छाई है, अधिकांश शेयरों के भाव 30 से लेकर 50 प्रतिशत तक भारी नुकसान में हैं और करोड़ों रिटेल निवेशक घाटे में है, लेकिन सरकार भारी टैक्स वसूल कर मालामाल हो रही है। इक्विटी शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगाए गए सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) का संग्रह चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल, 2025 से 10 फरवरी, 2026 के दौरान 50,279 करोड़ रुपये रहा।
यानी सरकार ने इस साल एसटीटी से 50 हजार करोड़ रुपये की मोटी कमाई की है और इस बजट में वित्तमंत्री ने शेयरों के वायदा सौदों पर एसटीटी 150 प्रतिशत तक और बढ़ा दिया गया है। एसटीटी, शेयरों की खरीद और बिक्री दोनों स्थिति में वसूला जाता है।
निवेशकों के नुकसान पर भी टैक्स
भले ही निवेशक घाटे में शेयर बेचे या फायदे में, वित्तमंत्री को इससे कोई वास्ता नहीं। एसटीटी डबल टैक्सेशन है क्योंकि सरकार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) भी वसूलती है। पिछले साल बजट में एसटीसीजी टैक्स 15% से बढ़ाकर 20% तथा एलटीसीजी 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया था। इस तरह एसटीटी डबल टैक्सेशन हुआ।
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वित्त मंत्री ने इस बार बजट में वायदा सौदों पर एसटीटी बढ़ाने पर यह कहा कि सरकार रिटेल निवेशकों को भारी जोखिम वाले वायदा सौदों पर दूर रखना चाहती है। सरकार का यह कदम सही है, लेकिन फिर डिलीवरी वाले इक्विटी शेयरों की खरीद-बिक्री पर एसटीटी क्यों हैं? एक फरवरी को बजट में एसटीटी बढ़ाने की घोषणा से ही उस दिन मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये घट गया था।
महंगे IPO में हो रही लूट पर चुप्पी
निवेशकों का कहना है कि सरकार की इन्हीं बेतुकी नीतियों के कारण भारतीय शेयर बाजार घोर मंदी से त्रस्त है। दुनिया भर के शेयर बाजार नई ऊंचाइयां छू रहे हैं, लेकिन भारत का शेयर बाजार देश की तेज ग्रोथ के बावजूद घोर मंदी से जूझ रहा है। बाजार का व्यापक रूख दर्शाने वाला बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स अपने सर्वोच्च स्तर से 57,827 अंक से 13% नुकसान में आ गया है। मिडकैप शेयरों का भी बुरा हाल है। लेकिन महंगे आईपीओ में रिटेल निवेशकों को चूना लगाने के लिए बाजार के बड़े सट्टेबाज और फंड हाउस आपसी सांठगांठ से केवल कुछ बड़ी कंपनियों यानी लार्जकैप शेयरों को बढ़ाकर सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपरी स्तरों पर टिकाए हुए हैं।
नियामक सेबी (SEBI) ने आईपीओ मार्केट (IPO Market) में लालची मर्चेंट बैंकरों और कंपनी प्रमोटरों को पूरी छूट दे रखी है। चाहे जिस मनमाने भाव पर आईपीओ लाओ और ग्रे मार्केट में खूब सट्टेबाजी कर रिटेल निवेशकों को मूर्ख बनाकर लूटो, कोई रोक-टोक नहीं। पिछले 5 साल में लगभग 350 आईपीओ के जरिए 5.50 ट्रिलियन रुपये से अधिक की पूंजी बटोरी गयी। जिसमें से करीब 65% यानी करीब 3.50 ट्रिलियन रुपये पूंजीपतियों की ऑफ फॉर सेल थी और इनसे से करीब 44% आईपीओ नुकसान में आ गए हैं। इस भारी नुकसान पर वित्तमंत्री और सेबी प्रमुख ‘चुप्पी’ साधे हुए हैं।
LTCG खत्म करे सरकार: राघव चढ़ा
संसद में बजट चर्चा के दौरान रिटेल निवेशकों के हित में इस डबल टैक्सेशन के मुद्दे को केवल आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने ही उठाया। आप सासंद ने सरकार से शेयर बाजार में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। राज्यसभा में चड्ढा ने कहा कि बजट में एसटीटी बढ़ाया गया है, जिसका असर दूरगामी होगा।
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एसटीटी को असल में एलटीसीजी की जगह लाने के लिए शुरू किया गया था। एसटीटी तब लागू हुआ था, जब इक्विटी पर एलटीसीजी टैक्स जीरो था। उन्होंने चेतावनी दी कि STT और LTCG दोनों को बनाए रखने से असली लॉन्ग टर्म निवेशक हतोत्साहित होंगे।
मुंबई से विष्णु भारद्वाज की रिपोर्ट-
