राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस, (कॉन्सेप्ट फोटो)
National Productivity Council (NPC) Update: भारत में हर साल 12 फरवरी को ‘राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन न केवल कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रतीक है, बल्कि देश के आर्थिक विकास में उत्पादकता के महत्व को रेखांकित करने का एक प्रमुख अवसर भी है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत स्थापित ‘राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद’ (NPC) द्वारा इस दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसके साथ ही देश भर में ‘राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह’ (12-18 फरवरी) की शुरुआत भी होती है।
राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के सभी क्षेत्रों में उत्पादकता, गुणवत्ता और दक्षता के प्रति जागरूकता पैदा करना है। उत्पादकता का अर्थ केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि उपलब्ध संसाधनों (जैसे श्रम, समय, धन और कच्चा माल) का इस प्रकार उपयोग करना है कि कम से कम लागत में अधिकतम और श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
यह दिवस विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), कृषि और सेवा क्षेत्रों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए प्रेरित करता है। 2026 के संदर्भ में, जब भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब प्रत्येक नागरिक और संस्थान की उत्पादकता देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वर्तमान युग में डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने उत्पादकता की परिभाषा बदल दी है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों ने औद्योगिक उत्पादकता को नई ऊंचाई प्रदान की है। अब ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए समय की बचत की जा रही है और मानवीय त्रुटियों को कम किया जा रहा है।
इस वर्ष के आयोजनों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कैसे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। इसे ‘ग्रीन प्रोडक्टिविटी’ (Green Productivity) कहा जा रहा है, जो सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।
यह भी पढ़ें: Gold-Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी, 2,000 रूपए फिसला सिल्वर, गोल्ड 676 रूपए सस्ता
उत्पादकता दिवस केवल मशीनों की दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘मानव संसाधन’ के विकास पर भी केंद्रित है। कर्मचारियों का कौशल विकास, कार्यस्थल पर बेहतर माहौल और मानसिक स्वास्थ्य भी उत्पादकता बढ़ाने के प्रमुख कारक हैं। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद इस दौरान विभिन्न सेमिनार, कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं आयोजित करती है, ताकि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।