मशहूर फिनफ्लुएंसर अवधूत साठे के खिलाफ SEBI का एक्शन, 546 करोड़ रुपये जब्त; मार्केट में हड़कंप
Avadhut Sathe: अगस्त 2025 में सेबी की टीम ने अवधुत साठे की एकेडमी पर छापा मारा था। उनके ट्रेनिंग सेशन में पेनी स्टॉक्स को बढ़ावा देने और निवेशकों को लुभावने रिटर्न्स का वादा करने की शिकायतें थीं।
- Written By: मनोज आर्या
अवधुत साठे, (कॉन्सेप्ट फोटो)
SEBI Action On Avadhut Sathe: सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मुंबई के जाने-माने फिनफ्लुएंसर अवधूत साठे और उनकी कंपनी अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी (ASTAPL) पर बड़ी कार्रवाई की है। मार्केट रेग्युलेटर ने उन्हें शेयर मार्केट से बैन कर दिया है और उनकी करीब ₹546.16 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है। सेबी का कहना है कि साठे और उनकी कंपनी ने शेयर मार्केट एजुकेशन के नाम पर असली में निवेश सलाह और रिसर्च सर्विस दी है। लेकिन उनके पास SEBI द्वारा आवश्यक पंजीकरण नहीं था। उन पर आरोप है कि वे कोर्स फीस लेकर लोगों को किसी खास शेयरों में निवेश की सलाह दे रहे थे, जो नियमों के खिलाफ है।
कुल मिलाकर 2015 से 2025 के बीच साठे ट्रेडिंग एकेडमी ने ₹601.37 करोड़ से ज्यादा राशि इकठ्ठा की थी, जिसमें से 2020 से 2025 के बीच की आठ कोर्स बैच से मिले ₹546.16 करोड़ को SEBI ने गैरकानूनी कमाई माना है।
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग पर बैन
साठे और उनकी अकादमी दोनों को फौरन सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया। अब वे शेयर खरीद या बेच नहीं सकते। उनकी बैंक और डीमैट अकाउंट अकाउंट फ्रीज कर दी गई है। उन पर निर्देश है कि ₹546.16 करोड़ की ज़ब्ती राशि को फिक्स्ड डिपोजिट में डालकर SEBI के नाम करें। SEBI ने कहा है कि ये कदम शिक्षा की आड़ में चल रहे अवैध वित्तीय सलाहकारों और फिनफ्लुएंसर कल्चर पर ब्रेक लगाने के लिए है।
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पहले भी एक्शन ले चुकी है सेबी
अगस्त 2025 में सेबी की टीम ने अवधुत साठे की एकेडमी पर छापा मारा था। उनके ट्रेनिंग सेशन में पेनी स्टॉक्स को बढ़ावा देने और निवेशकों को लुभावने रिटर्न्स का वादा करने की शिकायतें थीं। आरोपी एडवाइज़री सेवाएं देने को शिक्षा बताकर छुपाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन SEBI ने पहले जब मार्च 2024 में चेतावनी दी थी, तब भी ये गतिविधियां जारी रहीं। यही वजह है कि अब इतनी सख्त एक्शन हुआ है।
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क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारत में बढ़ रही “फिनफ्लुएंसर” संस्कृति और अनियोजित निवेश सलाह की तरफ़ सतर्कता का प्रतीक है। SEBI का मानना है कि बिना पंजीकरण और लाइसेंस के दिए जाने वाले निवेश-सलाह से छोटे निवेशक जोखिम में पड़ सकते हैं। इस कदम को “बड़े पैमाने पर निवेशकों की रक्षा” के लिए समय-कदम माना जा रहा है।
