शेयर मार्केट, (प्रतीकात्मक तस्वीर)
FPI Investment: अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में 19,675 करोड़ रुपये डाले हैं। घरेलू शेयर बाजार के लिए यह अच्छी खबर है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई का यह फ्लो लगातार तीन महीने की भारी बिकवाली के बाद हुआ है।
बता दें कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे।
कुल मिलाकर, 2025 में, एफपीआई ने भारतीय शेयरों से नेट रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की है। यह एफपीआई के प्रवाह की दृष्टि से सबसे खराब वर्षों में रहा है।आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (13 फरवरी तक) शेयरों में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के मैनेजमेंट हेड-रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे उन की भारत समेत उभरते बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।
इसी तरह की राय जताते हुए एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी एक्सपर्ट वकारजावेद खान ने कहा कि यह प्रवाह अमेरिका-भारत व्यापार करार, समर्थन देने वाले 2026-27 के आम बजट और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में कमी की वजह से देखने को मिला है।
एफपीआई फरवरी माह के 11 कारोबारी सत्रों में से सात में शुद्ध खरीदार रहे और चार सत्रों में बिकवाल रहे। इसके बावजूद आंकड़ों से पता चलता है कि एफपीआई ने इस महीने शुद्ध रूप से 1,374 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इसकी वजह यह है कि 13 फरवरी को निफ्टी में 336 अंक की गिरावट के दौरान एफपीआई ने 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस सप्ताह ‘एंथ्रोपिक झटके’ की वजह से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
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पिछले सप्ताह शेयर बाजार में तेज गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी, जिनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स, भारतीय रिजर्व बैंक के संकेत, आईटी सेक्टर की स्थिति, सोना-चांदी की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शामिल हैं, जो भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।