भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (सोर्स- सोशल मीडिया)
RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है।
दिसंबर 2025 में आखिरी बार दरों में कटौती के बाद से RBI ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि पहले किए गए नीतिगत बदलावों का असर अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह दिख सके। इस बार भी MPC ने अपना ‘न्यूट्रल’ स्टांस बरकरार रखा है, जिससे संकेत मिलता है कि बैंक भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार लचीले तरीके से फैसले लेगा।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू स्तर पर महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई बाधाएं और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी आगे जोखिम पैदा कर सकती है। RBI का मुख्य लक्ष्य महंगाई को टिकाऊ रूप से 4% के आसपास बनाए रखना और आर्थिक विकास को समर्थन देना है।
Watch: Governor of the Reserve Bank of India, Sanjay Malhotra says, “Accordingly, the MPC voted to keep the policy repo rate unchanged, even as it remains vigilant, closely monitoring incoming information and assessing the balance of risks. The MPC also decided to continue with a… pic.twitter.com/pfRy6q5nio — IANS (@ians_india) April 8, 2026
उन्होंने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और ऊर्जा ढांचे को नुकसान के कारण ‘सप्लाई शॉक’ जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे महंगाई और ग्रोथ दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बताई गई है, जो बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।
विदेशी निवेश के मोर्चे पर अच्छी खबर यह है कि नेट FDI में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भारत के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, निर्यात क्षेत्र में चुनौतियां बनी हुई हैं और साल के शुरुआती महीनों में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में हल्की गिरावट देखी गई है। रुपये की स्थिति पर RBI ने स्पष्ट किया कि वह केवल अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है, किसी विशेष स्तर को बनाए रखने के लिए नहीं।
पिछले एक साल में RBI ने फरवरी से जून 2025 के बीच 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी, जबकि अगस्त-अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में दरों को स्थिर रखा गया। दिसंबर 2025 में 25 बेसिस प्वाइंट की आखिरी कटौती की गई थी।
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मौजूदा वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% रखा गया है, जिसमें तिमाही आधार पर उतार-चढ़ाव संभव है। RBI ने माना कि ऊर्जा कीमतों में हालिया तेजी महंगाई के लिए जोखिम बनी हुई है, हालांकि खाद्य कीमतों का परिदृश्य फिलहाल संतुलित दिख रहा है।