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सेविंग्स अकाउंट छोड़ FD की तरफ भागे भारतीय! RBI के ताजा आंकड़ों ने खोला इसके पीछे का बड़ा राज

Best FD Investment: भारतीय रिजर्व बैंक डेटा अनुसार, पिछले 5 सालों में भारतीय सेविंग्स अकाउंट से पैसा निकालकर FD Investment में लगा रहे हैं। बेहतर रिटर्न और अधिक ब्याज दर इसका मुख्य कारण है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Jun 03, 2026 | 02:41 PM

सेविंग्स अकाउंट और FD (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Smart FD Investment Strategy: भारत में लोग अब अपने बैंक खातों में पैसा रखने का तरीका पूरी तरह से बदल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के नए आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच सालों में बड़ा बदलाव आया है। बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं ने कम ब्याज वाले सेविंग्स अकाउंट से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। अब वे अपना पैसा ज्यादा रिटर्न देने वाले टर्म डिपॉजिट में लगा रहे हैं।

इस बदलाव से देश में बैंक डिपॉजिट की संरचना में एक बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। कुल बैंक डिपॉजिट में सेविंग्स का हिस्सा मार्च 2022 के 34.6 फीसदी से घटकर मार्च 2026 में 28.7 फीसदी हो गया है। इसके उलट इसी समय के दौरान टर्म डिपॉजिट का हिस्सा 55.2% से बढ़कर 61.6% हो गया है। यह दर्शाता है कि ग्राहक फिक्स्ड समय के लिए अपना पैसा लॉक कर रहे हैं।

सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिल रही कम ब्याज दर और घटती परचेजिंग पावर का मुख्य कारण

सेविंग्स बैंक रेट में भारी गिरावट 2025-26 के दौरान बहुत अधिक तेज हो गई थी। बैंकों ने रिसोर्स जुटाने के लिए आकर्षक रेट देना जारी रखा है। सबसे बड़ा बैंक एसबीआई सेविंग्स अकाउंट पर सिर्फ 2.5% का ही इंटरेस्ट दे रहा है। पिछले दस वर्षों में सेविंग्स बैंक रेट लगभग 6-7% से नीचे गिर गए हैं।

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एसबीआई एक साल के एफडी पर 6.25% और दो साल के डिपॉजिट पर 6.45% ब्याज देता है। एचडीएफसी बैंक भी एक साल के एफडी पर 6.25% दे रहा है। सेविंग्स बैंक रेट रिटेल महंगाई से कम होने पर असली रिटर्न नेगेटिव होता है। इससे बैंक में रखे पैसे की परचेजिंग पावर समय के साथ काफी कम होती है।

बैंकों के मौजूदा सेविंग्स रेट अप्रैल के इन्फ्लेशन लेवल 3.48% से लगभग 100 बेसिस पॉइंट कम हैं। 15 मई 2026 तक बैंकिंग सेक्टर के डिमांड डिपॉजिट 31.65 लाख करोड़ रुपये थे। वहीं इसी अवधि में टर्म डिपॉज़िट 225.23 लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर था। करंट अकाउंट पर ग्राहकों को किसी भी तरह का कोई ब्याज नहीं मिलता है।

जमा राशि के मुख्य स्रोत के रूप में परिवारों की हिस्सेदारी और बड़े एफडी का बढ़ता दबदबा

आंकड़ों से पता चलता है कि परिवार भारत के जमा आधार का मुख्य हिस्सा बने हुए हैं। बचतकर्ता पारंपरिक बचत खातों की तुलना में सावधि जमा को बहुत अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे बैंकों की देनदारी बदल रही है और सावधि जमा की भूमिका काफी मजबूत हो रही है।

बैंकों में परिवारों की हिस्सेदारी मार्च 2026 के अंत में 59.3% थी। परिवार म्यूचुअल फंड और इक्विटी को निवेश के पसंदीदा विकल्पों के रूप में तेजी से अपना रहे हैं। गैर-वित्तीय क्षेत्र से जमा 17.7% से बढ़कर 18.5% हो गया है। वित्तीय निगमों से जमा 6.8% से बढ़कर 7.8% हुआ है।

मार्च 2026 तक 46.3% जमा 1 करोड़ रुपये और उससे अधिक थीं। अकेले 5 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि कुल जमाओं का 34.8% थी। दूसरी ओर 5 लाख रुपये तक की जमा राशियां केवल 17.8% थीं। सीनियर सिटिज़न्स का बैंक डिपॉजिट में हिस्सा मार्च 2026 में 20% था।

यह भी पढ़ें: RBI द्वारा 1.14 लाख करोड़ का सोना बेचने की खबर फर्जी, सरकार ने बताई सच्चाई

पब्लिक सेक्टर के बैंकों का डिपॉजिट जुटाने में उत्कृष्ट योगदान और भविष्य के शानदार रुझान

मार्च 2026 के आखिर तक कमर्शियल बैंकों में डिपॉजिट साल-दर-साल 11.5% की दर से बढ़ा है। एक साल पहले यह शानदार वृद्धि 10.6% की दर से दर्ज की गई थी। सभी आबादी वाले ग्रुप की बैंक ब्रांचों ने साल के दौरान डबल-डिजिट डिपॉजिट  ग्रोथ दर्ज की है।

FY26 के दौरान डिपॉजिट जुटाने में पब्लिक सेक्टर के बैंक सबसे आगे रहे हैं। सिस्टम द्वारा जुटाए गए इंक्रीमेंटल डिपॉजिट का 50.8% हिस्सा इन्ही बैंकों का था। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने 38.6% का बड़ा योगदान दिया है। इससे पता चलता है कि इनकी भी अहम भूमिका रही है।

7% से कम इंटरेस्ट वाले टर्म डिपॉजिट का हिस्सा मार्च 2026 में 61.8% हो गया है। एक से तीन साल की मैच्योरिटी वाले टर्म डिपॉजिट 69.8% तक पहुंच गए हैं। रीजनल रूरल बैंकों के पास मौजूद डिपॉजट का हिस्सा चार साल पहले के 3.2% से घटकर 2.9% हो गया है।

Rbi data shows indians shifting to fd investment from savings

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Published On: Jun 03, 2026 | 02:41 PM

Topics:  

  • Business News
  • Fixed Deposit
  • Investment
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