UAE के बाहर होने के बाद OPEC+ ने लिया बड़ा फैसला, क्या कच्चे तेल की कीमतों पर लगेगा लगाम? जानें सबकुछ
OPEC Plus Oil Production Increases: तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC+ ने जून से कच्चे तेल के उत्पादन में 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी करने का बड़ा फैसला लिया है जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
ओपेक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
OPEC Plus Oil Production Increases Impact India: ग्लोबल ऑयल मार्केट में मची उथल-पुथल के बीच रविवार को तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। संगठन के सदस्य देशों ने जून महीने से कच्चे तेल के उत्पादन कोटा में बड़ी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।
जून से बढ़ेगा उत्पादन
रविवार को हुई इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि ओपेक प्लस समूह जून से संयुक्त रूप से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेगा। यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने उत्पादन कोटे को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बाद इस संगठन से बाहर होने का फैसला किया है। यूएई के इस फैसले के बाद संगठन के सात प्रमुख सदस्यों अल्जीरिया, इराक, कजाकिस्तान, कुवैत, ओमान, रूस और सऊदी अरब ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की जिम्मेदारी ली है।
रणनीतिक संदेश और बाजार की स्थिरता
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला केवल तेल की मात्रा बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिए ओपेक प्लस दुनिया को एक संदेश भी दे रहा है। रिस्टैड एनर्जी के विश्लेषक जोर्ज लियोन का कहना है कि इसके माध्यम से समूह यह जताना चाहता है कि यूएई के जाने से संगठन के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, युद्ध और तनाव की स्थितियों के बावजूद वैश्विक तेल बाजार पर इस समूह का प्रभाव आज भी कायम है।
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तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित
तेल उत्पादन बढ़ाने का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद स्थिति बिगड़ गई थी। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज पर नाकेबंदी कर दी। जिससे वैश्विक तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस नाकेबंदी के कारण कई देशों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है।जिससे आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
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भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है इसलिए खाड़ी देशों में होने वाली छोटी सी हलचल भी भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। ओपेक प्लस द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले से भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। बाजार में कच्चे तेल की अधिक उपलब्धता कीमतों को बेकाबू होने से रोकेगी जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में स्थिरता बनी रह सकती है। यदि आपूर्ति सुचारू रहती है तो यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक शुभ संकेत साबित होगा।
