इंडियन इकोनॉमी (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़े दावे किए जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि हमारे देश की इकोनॉमी बाकी सभी देशों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। बताया जा रहा है कि भारत साल 2030 तक 7,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकती है। हालांकि ऐसा होने के लिए भारत को इंफ्रास्क्रचर पर 2,200 अरब डॉलर का निवेश करने की जरूरत है।
रियल एस्टेट कंस्लटेंट नाइट फ्रैंक इंडिया ने गुरूवार को अपनी रिपोर्ट भारत अवसंरचना प्राइवेट इंवेस्टमेंट को पुनर्जीवित करना पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया है भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को साल 2030 तक 7000 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए इंफ्रास्क्रचर के विकास पर 2200 अरब अमेरिकी डॉलर का संभावित निवेश जरूरी होगा।
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रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक 7000 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक आकार हासिल करने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था को 2024-2030 के बीच 10.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर यानी सीएजीआर से बढ़ने की जरूरत है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक यानी सीएमडी शिशिर बैजल ने कहा है कि इंफ्रास्क्रचर के विकास पर मजबूत प्रोत्साहन और सरकार द्वारा बजटीय आवंटन में वृद्धि से लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक यानी एलपीआई में भारत की रैंकिंग 2014 में 54 से बढ़कर 2023 में 38 हो गई है।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नीति निर्माताओं द्वारा भारत के बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण विस्तार के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। बैजल ने कहा कि इससे भारत के इंफ्रास्क्रचर के विकास और इकोनॉमिक ग्रोथ में प्राइवेट कंपनियों के प्राइवेट कंपनियों से हिस्सा लेने की गुंजाइश बढ़ेगी।
उन्होंने कहा है कि हालांकि इस दायरे को सीमित करने वाली कुछ अड़चनें हैं। इसलिए सरकार के बजट में राजकोषीय विवेक को संतुलित करने और देश में समावेशी तथा दीर्घकालिक टिकाऊ इकोनॉमिक ग्रोथ लाने के लिए इंफ्रास्क्रचर के विकास की खातिर प्राइवेट इंवेस्टमेंट के उच्च आवंटन को प्रेरित करने के वास्ते बड़े कदम उठाने की जरूरत है।। नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों की इंफ्रास्क्रचर में निवेश पर भारी निर्भरता राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों पर दबाव डाल सकती है। परामर्शदाता का मानना है कि बुनियादी ढांचे के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)