सांकेतिक तस्वीर (Image- AI)
Iran-USA Conflict Impact on India: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर अब भारत के बाजारों, फैक्ट्रियों और घरों तक साफ दिखाई देने लगा है। यह सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर गहरा झटका है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट के कारण कई इंडस्ट्रीज में संकट पैदा हो गया है—कहीं सड़क बनाने के लिए डामर कम पड़ रहा है, कहीं बीयर की कैन और कंडोम जैसी जरूरत की चीज़ें गायब हो रही हैं, तो कहीं पैकेजिंग उद्योग तक प्रभावित हुआ है। आइए जानते हैं किन सेक्टरों पर युद्ध का असर हो रहा है।
LNG और फ्यूल की बढ़ी कीमतों ने सीमेंट, स्टील और टाइल्स की उत्पादन लागत बढ़ा दी है। गुजरात के मोरबी जैसे इंडस्ट्रियल हब में सिरेमिक यूनिट्स धीमी पड़ गई हैं। इससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी और कई निर्माण कार्यों में देरी हो रही है।
लगभग ₹7,000–8,000 करोड़ के कंडोम उद्योग पर असर पड़ा है। पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन बाधित होने से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसी कच्ची सामग्री की कमी हो गई है, जिससे उत्पादन कम हो रहा है और कीमतें बढ़ने का खतरा है।
कंडोम इंडस्ट्री (Image -Social Media)
फिरोजाबाद जैसे ग्लास हब में कई भट्टियां बंद या कम क्षमता पर चल रही हैं। बोतलों की कीमतें करीब 20% तक बढ़ गई हैं, वहीं पैकेजिंग सामग्री, लेबल और टेप महंगे हुए हैं। शिपिंग और एल्युमिनियम की कमी के कारण बीयर, दवाइयों और परफ्यूम की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
LPG और अन्य ईंधन की कमी ने कई छोटे और मंझोले प्लांट दबाव में ला दिए हैं। एल्युमिनियम और अन्य धातुओं की कीमतों में तेजी आई है, जिससे ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत बढ़ी है।
ऑटो सेक्टर (Image- Social Media)
तेल से बनने वाले प्रोडक्ट्स जैसे नाफ्था पर निर्भर उद्योगों की लागत बढ़ी है। प्लास्टिक पैकेजिंग, शैम्पू, पैकेज्ड फूड और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होने लगी हैं।
बीज और खाद की सप्लाई पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर करती है। इस क्षेत्र में कमी के कारण किसानों तक समय पर सामग्री नहीं पहुंच पा रही है, जिससे पैदावार और फसल चक्र प्रभावित हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल और ट्रेड रूट्स पर तनाव बढ़ने से शिपिंग कंपनियों का जोखिम और बीमा लागत बढ़ी है। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर पड़ा है और शिपिंग रेट्स में भी उछाल आया है।
शिपिंग ट्रेड (Image- Social Media)
छोटे और मंझोले उद्योग कच्चे माल की बढ़ी कीमत, बिजली और गैस की लागत और घटते ऑर्डर से प्रभावित हैं। कई यूनिट्स उत्पादन घटाने या अस्थायी रूप से बंद होने को मजबूर हैं, जिससे रोजगार पर असर पड़ा है।
LPG और ईंधन की बढ़ी कीमतों ने रेस्टोरेंट्स और किचन ऑपरेशन महंगे कर दिए हैं। एयरलाइंस का प्रमुख खर्च ATF बढ़ा है, जिससे टिकट और फ्लाइट्स प्रभावित हो रही हैं।
कच्चे तेल की बढ़ी कीमत और सप्लाई में बाधा के कारण भारत समेत दुनिया में ईंधन महंगा हुआ। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम कर आम आदमी पर असर कम करने की कोशिश की।
कच्चे तेल की बढ़ी कीमत और सप्लाई में बाधा
यह भी पढ़ें- पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 30 जून तक टैक्स फ्री हुए ये जरूरी सामान
खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए हैं, जिससे रोजगार और रेमिटेंस पर दबाव बढ़ा है। ईरान-यूएस टकराव का असर भारत की अर्थव्यवस्था के हर हिस्से में दिखाई दे रहा है। यह केवल ऊर्जा संकट नहीं है, बल्कि एक चेन रिएक्शन है जो इंडस्ट्री से लेकर आम आदमी तक पहुंच चुका है। अगर यह तनाव लंबा चलता है, तो महंगाई और आर्थिक सुस्ती दोनों का खतरा और बढ़ सकता है।