नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, (डिजाइन फोटो/ नवभारत)
India’s Reaction on Donald Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ बिल पर भारतीय विदेश मंत्रालय की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें इस बिल की के बारे में जानकारी है। उन्होंने कहा कि एनर्जी सोर्सिंग के बड़े सवाल पर हमारा रुख जगजाहिर है। हम ग्लोबल मार्केट के बदलते डायनामिक्स और अपने 1.4 अरब भारतीय लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स से सस्ती एनर्जी हासिल करने की जरूरत से गाइड होते हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बदलेगी। हमारा ध्यान इस बात पर है कि भारत के लोगों को सस्ती ऊर्जा मुहैया कराई जाए। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनियाभर के बाजारों पर नजर बनाए हुए है।
अमेरिका की सत्ता में दूसरी बार लौटने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने अजीबो-गरीब फैसले से दुनिया को चौंकाते आए हैं। ट्रंप के इन फैसलों से पूरी दुनिया में हंगामा मचा है। वहीं, अमेरिका पर भी इसका असर देखा जा रहा है। खासकर टैरिफ के मोर्चे पर ट्रंप आए दिन धमकी देते रहते हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति की जमकर आलोचना भी हो रही है, क्योंकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
मामला कोर्ट तक पहुंच गया है, और शुक्रवार की रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बेहद अहम यानी ‘फैसले का दिन’ रहने वाला है। एक तरह उनकी पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। इस फैसले की निगाहें सिर्फ अमेरिका पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार नीतियों पर भी टिकी हुई हैं।
अगर ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला आता है, तो ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए सभी विवादित टैरिफ कानूनी रूप से सही ठहरेंगे। कंपनियों और आयातकों को कोई रिफंड नहीं मिलेगा। सरकार को अरबों डॉलर का राजस्व सुरक्षित रहेगा। इसके बाद टैरिफ को लेकर ट्रंप इससे भी बड़े दांव चल सकते हैं। ट्रंप की America First और हार्ड ट्रेड पॉलिसी को मजबूती मिलेगी। चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने की रणनीति को समर्थन मिलेगा।
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इसके साथ ही पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम देख रहे हैं कि चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार हमले हो रहे हैं। ऐसे सांप्रदायिक मामलों से तेजी से और सख्ती से निपटना चाहिए। हमने देखा है कि ऐसी घटनाओं को निजी दुश्मनी, राजनीतिक मतभेदों या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति है। ऐसी अनदेखी करने से अपराधियों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना गहरी होती है।