India GCC Relations: भारत के लिए क्यों खास हैं ‘GCC’ देश? आसान भाषा में जानिए इस संगठन की ताकत और अहमियत
India GCC Relations: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) 6 देशों का संगठन है जो भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साल 2024-25 में दोनों का व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा जिससे यह भारत के लिए बेहद अहम है।
- Written By: प्रिया सिंह
भारत और GCC देश (सोर्स-सोशल मीडिया)
India GCC Relations News: भारत की ऊर्जा जरूरतों, विदेश व्यापार और पश्चिम एशिया में रणनीतिक हितों की बात हो तो गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार देशों का यह बड़ा समूह भारत का सबसे बड़ा और अहम क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है। देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने में भी इस बड़े संगठन की एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। हाल के वर्षों में भारत और जीसीसी के बीच व्यापार, निवेश और सुरक्षा को लेकर आपसी सहयोग लगातार बढ़ा है।
यह जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी हो जाता है कि आखिर यह संगठन क्या है और इसमें कौन-कौन से प्रमुख देश पूरी तरह से शामिल हैं। जीसीसी की स्थापना 25 मई 1981 को की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना है। इस बड़े संगठन का मुख्य मुख्यालय रियाद में स्थित है जो क्षेत्रीय स्थिरता को बहुत ज्यादा मजबूत करने का काम करता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय को बेहतर बनाना है ताकि सभी देशों का तेजी से विकास हो सके।
जीसीसी के छह सदस्य देश
जीसीसी मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र के छह देशों का एक बहुत ही बड़ा राजनीतिक और मजबूत आर्थिक संगठन है। इन प्रमुख सदस्य देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान देश पूरी तरह से शामिल हैं। ये सभी देश दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों की सूची में बहुत ही प्रमुखता से शामिल होते हैं। भारत अपनी कच्चे तेल और एलएनजी की बड़ी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से पूरा करता है।
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178.56 अरब डॉलर का भारी व्यापार
भारत और इन छह देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध समय के साथ लगातार बहुत ही मजबूत हो रहे हैं। भारतीय दूतावास और पीआईबी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में इनके बीच द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा। यह भारी भरकम आंकड़ा साफ दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक लेनदेन कितने बड़े और व्यापक स्तर पर हो रहा है। इसलिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेज आर्थिक विकास के लिए इन देशों के साथ मजबूत संबंध होना बेहद अहम है।
एक करोड़ भारतीयों का घर
व्यापार के अलावा इन देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक स्थायी रूप से रहते हैं और वहां काम करते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में यहां रहने वाले भारतीयों ने भारत को 52.44 अरब डॉलर की भारी रेमिटेंस भेजी थी। यह राशि भारत को दुनिया भर से मिलने वाली कुल रेमिटेंस का लगभग 38 प्रतिशत है जो कि एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इन देशों से भारत में विदेशी निवेश भी लगातार आ रहा है जो कि सितंबर 2025 तक 31 अरब डॉलर को पार कर गया था।
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मुक्त व्यापार समझौते पर बड़ी चर्चा
भारत और इस संगठन के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए इन दिनों एक बहुत ही बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों ही पक्षों ने 24 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से एफटीए वार्ता शुरू करने की बहुत बड़ी और अहम घोषणा की थी। इससे पहले 5 फरवरी 2026 को इस अहम वार्ता के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए थे। भारत सरकार के अनुसार इस प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार और विदेशी निवेश को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ावा देना है।
