

Income Tax Notice Relief: बेंगलुरु के बालकृष्णमूर्ति रामचंद्रबाबू को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण से बड़ी राहत मिली है। बैंक खाते में बड़ी नकद राशि जमा करने पर आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस जारी किया था।
किसान ने अपनी चार एकड़ कृषि भूमि पर उगाई फल-सब्जियों को APMC मंडी में बेचा था। विभाग के अघोषित आय के दावे को ITAT बेंगलुरु ने ठोस दस्तावेजों के आधार पर खारिज कर दिया।
बेंगलुरु के किसान बालकृष्णमूर्ति रामचंद्रबाबू ने अपने SBI बैंक खाते में बड़ी नकद राशि जमा कराई थी। साथ ही उन्होंने इस दौरान संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े कुछ लेन-देन भी किए थे। आयकर विभाग को उनके इनकम टैक्स रिटर्न में इन लेन-देन का ब्योरा नहीं मिला।
आयकर विवरण प्रस्तुत न होने के कारण विभाग ने उन्हें धारा 69A के तहत नोटिस जारी कर दिया।किसान रामचंद्रबाबू के पास कुल 4 एकड़ 4 गुंटा कृषि भूमि उपलब्ध है। इस जमीन पर वे नियमित रूप से फल और सब्जियों की खेती करते हैं।
उपज को स्थानीय APMC मंडी में बेचकर मिली नकद राशि ही उन्होंने बैंक में जमा की थी। कृषि आय कर-मुक्त होने के कारण अज्ञानतावश उन्होंने ITR में इसका उल्लेख नहीं किया था।
इनकम टैक्स अधिकारी ने तर्क दिया कि सरकारी जमीन रिकॉर्ड यानी RTC में फसल का विवरण दर्ज नहीं था। अधिकारी का कहना था कि किसान के पास बीज, खाद और कीटनाशक खरीद के पक्के बिल मौजूद नहीं थे।
इसके अलावा पूर्ववर्ती और बाद के वर्षों के ITR में भी कृषि आय नहीं दर्शाई गई थी। इन तर्कों के आधार पर एओ और कमिश्नर ऑफ अपील्स यानी CIT(A) ने किसान की याचिका खारिज कर दी। विभाग द्वारा याचिका खारिज होने के बाद किसान ने ITAT बेंगलुरु की शरण ली।
न्यायाधिकरण में किसान ने राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त APMC मंडी के बिक्री बिल प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने अपनी कृषि भूमि के स्वामित्व से जुड़े सभी वैध दस्तावेज ट्रिब्यूनल के समक्ष रखे। इन प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा की।
ITAT बेंगलुरु ने आयकर विभाग के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि APMC राज्य सरकार का मान्यता प्राप्त संस्थान है, जिसके बिल झूठे नहीं हो सकते। अदालत ने माना कि छोटे स्तर पर खेती करने वाले किसानों के लिए खाद-बीज के पक्के बिल रखना व्यावहारिक नहीं है।
आयकर अधिकारी द्वारा दावों की कोई स्वतंत्र जांच या विपरीत सबूत पेश न करना विभाग की नाकामी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि ITR में कृषि आय न दर्शाना केवल एक अनुपालन संबंधी तकनीकी चूक थी। जब बिक्री के वैध APMC बिल और भूमि रिकॉर्ड मौजूद हों तो जमा राशि अघोषित आय नहीं मानी जा सकती।
ITAT ने धारा 69A के तहत लगाया गया कर प्रावधान रद्द करते हुए किसान के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले से देश भर के उन किसानों को राहत मिलेगी जो बैंक में कृषि आय नकद जमा करते हैं।