नए साल में नया नियम, 4 लेबर कोड और EPFO 3.0 से जुड़ी हर वो बात…जो आपकी जेब पर डालेगी असर
New Labour Code: केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है।
- Written By: मनोज आर्या
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
New Labour Code And EPFO Update: सरकार ने पांच साल के लंबे इंतजार के बाद चारों लेबर कोड्स को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार के अनुसार, इन संहिताओं से जुड़े नियम जारी होने के बाद वर्ष 2026 में ये पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगी। इससे देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
श्रम मंत्रालय ने 2026 में ईपीएफओ 3.0 लाने की भी योजना बनाई है। इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की निकासी प्रक्रिया और तेज होगी, साथ ही कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत पेंशन निर्धारण और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना 1976 के तहत बीमा दावों का निपटान भी आसान होगा।
तकनीक आधारित सेवाओं पर फोकस
केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 2025 भारत के श्रम और रोजगार तंत्र के लिए परिवर्तनकारी वर्ष रहा है। 21 नवंबर 2025 से चारों लेबर कोड्स लागू हो गए हैं, जिनके तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को एक आधुनिक और सरल ढांचे में समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि 2026 में सरकार का फोकस तकनीक आधारित सेवाओं, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और लेबर कोड्स के नियमों को लागू करने पर होगा। इससे कार्यस्थलों पर स्पष्टता, समानता और पूर्वानुमेयता बढ़ेगी व भारत एक आधुनिक, औपचारिक और समावेशी श्रम बाजार की ओर तेजी से बढ़ेगा।
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नए साल में रोजगार पैदा करना लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है। लगातार नीतिगत प्रयासों के चलते सामाजिक सुरक्षा कवरेज 10 साल पहले के 19 प्रतिशत से बढ़कर अब 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। मंत्री के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में सुधारों से निकासी प्रक्रिया सरल हुई है और करोड़ों सदस्यों को अपने फंड तक तेजी से पहुंच मिली है। वहीं ई-श्रम पोर्टल और नेशनल करियर सर्विस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बड़े पैमाने पर श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
लेबर कोड्स के खिलाफ ट्रेड यूनियन
हालांकि, कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड्स का विरोध करते हुए इन्हें श्रमिक-विरोधी बताया है। 22 दिसंबर 2025 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो वे और कड़े आंदोलन करेंगे।
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उद्योग जगत ने इन सुधारों का समर्थन किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि लेबर कोड्स से श्रमिकों के कल्याण के साथ-साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बढ़ावा मिलेगा और भारत का श्रम तंत्र भविष्य के लिए तैयार होगा।
