6 रुपये के कैरी बैग पर कंपनी को लगा 10 हजार का जुर्माना! कोर्ट ने ग्राहक के हक में सुनाया बड़ा फैसला
Delhi Carry Bag Dispute: आयोग ने फैसला सुनाते हुए ग्राहक की शिकायत को सही माना और कंपनी को 10 हजार रुपये की जुर्माना देने का आदेश दे दिया। अब यह मामला ग्राहकों के अधिकारों को लेकर काफी चर्चाओं में है।
- Written By: मनोज आर्या
6 रुपये के कैरी बैग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना, (AI जेनरेटेड इमेज)
Delhi Carry Bag Dispute: किसी भी मॉल, शोरूम या कोई बड़ी दुकानों से शॉपिंग के बाद कैरी बैग के लिए अतिरिक्त चार्ज का भुगतान करना आम बात है। ज्यादातर कस्टमर बिना कुछ सोचे पैसे देकर मॉल या दुकान से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन, अगर किसी ग्राहक को बिना कोई जानकारी दिए उसके शॉपिंग बिल में अलग से कैरी बैग का अतिरिक्त चार्ज जोड़ दिया जाए तो उस केस में क्या होगा? ऐक ऐसा ही मामला देश की राजधानी दिल्ली से सामने आया है। जहां 6 रुपये की कैरी बैग को लेकर शुरू हुआ विवाद साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) तक पहुंच गया।
आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए ग्राहक की शिकायत को सही माना और एक मशहूर फूटवियर कंपनी को 10 हजार रुपये की जुर्माना देने का आदेश दे दिया। अब यह मामला ग्राहकों के अधिकारों को लेकर काफी चर्चाओं में है।
क्या है यह पूरा मामला?
बता दें कि यह पूरा मामला आज से तीन साल पहले यानी कि 2023 का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की रहने वाले एक महिला ने एक नामी फूटवेयर स्टोर से लगभग 1,500 रुपये के जूते खरीदे थे। शॉपिंग के बाद जब स्टोर के कर्मचारियों की ओर से उन्हें जो बिल दिया गया, उसमें पता चला कि कैरी बैग के लिए अतिरिक्त 6 रुपये भी जोड़ दिए गए हैं। हालांकि, महिला ग्राहक की जो शिकायत थी, उसमें उनका कहना था कि स्टोर में कही भी इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई है कि कैरी बैग के लिए ग्राहकों को 6 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। स्टोर के अंदर न तो कई ऐसा बोर्ड था कि जिससे कैरे बैग के अतिरिक्त चार्ज के बारे में पता चल सके। महिला कस्टमर का यह तर्क था कि अगर उन्हें इस अतिरिक्त चार्ज के बारे में पहले से जानकारी होता तो वह अपना बैग अलग से लेकर आतीं।
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आयोग ने फैसले में क्या कहा?
सभी तर्क और जानकारियों के आधार साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि कैरी बैग के लिए चार्ज करना गलत नहीं है, लेकिन कस्टमर को पहले से इसकी जानकारी देनी चाहिए। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि विवाद कैरी बैग के लिए अतिरिक्त 6 रुपये का नहीं था, बल्कि ग्राहकों को पहले से जानकारी न देने का था। आयोग ने कहा कि जब कस्टमर को शॉपिंग से पहले चार्ज के बारे में जानकारी नहीं होती, तो वह सोच-समझकर फैसला नहीं ले पाता। इसी कारण से इस शिकायत को सही माना गया।
ग्राहक को मुआवजा देगी कंपनी
आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए कंपनी से ग्राहक को जुर्माने के रूप में 10 हजार रुपये देने को कहा है। इसमें मुआवजा के साथ-साथ मामले से जुड़े सभी खर्च शामिल हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया की हर कस्टमर को यह जानने का अधिकार है कि उसे किस चीज के लिए कितना और क्यों भुगतान करना पड़ रहा है।
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कंपनी ने सफाई में क्या कहा?
आयोग के सामने पेश हुई कंपनी ने यह दलील दी कि शापिंग के बाद दिए जाने वाला कैरी बैग एक अलग प्रोडक्ट है। कंपनी की ओर से कहा गया कि बिल में कैरी बैग के चार्ज को स्पष्ट रूप से दिखाया गया था। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि बैग ग्राहक की सहमति के बाद दिया गया था। हालांकि, आयोग को यह तर्क पर्याप्त नहीं लगा, क्योंकि विवाद का मुख्य मुद्दा पैसे लेना नहीं, बल्कि पहले से जानकारी न देना था।
