वित्त मंत्री ने कहा है कि, ‘‘ अधिक विखंडित ग्लोबल इकोनॉमी की ओर बढ़ना, जिसमें पुनर्परिभाषित गठबंधन तथा बदलते ट्रेड ट्रेंड शामिल हैं, वास्तव में भारत के लिए लाभकारी हो सकता है। जैसे-जैसे राष्ट्र अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्मूल्यांकन करते हैं, भारत को उम्मीद है कि वह वस्तुओं व सेवाओं के अपने स्रोतों में विविधता लाने की चाह रखने वाले कई देशों के लिए एक प्रमुख भागीदार बन जाएगा।''