घर से कार तक की EMI होगी कम, RBI अगले महीने देगा खुशखबरी
Home Loan EMI Reduced: आरबीआई की संभावित रेपो रेट कटौती से होम लोन और कार लोन की EMI घट सकती है। दिसंबर में ब्याज दर 9% से 8.75% तक आ सकती है। इससे ग्राहकों को बंपर बचत होगी।
- Written By: रंजन कुमार
EMI होगी कम। इमेज-एआई
RBI Repo Rate Cut December 2025: आपकी भी कार और होम लोन की ईएमआई जाती है तो गुड न्यूज है। दिसंबर में लोन की EMI में कटौती हो सकती है। दरअसल, अगले महीने फिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रेपो रेट में कमी ला सकता है। इससे होम लोन, कार लोन समेत तमाम तरह के लोन पर ब्याज की दर कम हो जाएंगी। मॉर्गन स्टेनली ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है कि आरबीआई दिसंबर महीने में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। इससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो जाएगी।
ऐसे समझें कि किसी व्यक्ति ने 10 लाख रुपए का होम लोन लिया है। उसकी अवधि 20 साल है। पहले ब्याज दर 9% थी, जिस पर EMI लगभग 8,992 रुप आती थी। अगर, अब आरबीआई ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की कटौती करता है और नई दर 8.75% हो जाती है, तो EMI घटकर लगभग 8,850 रुपए हो जाएगी। इसका मतलब हुआ कि हर महीने करीब 142 रुपए की बचत होगी। ये बचत छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में यह कुल मिलाकर कई हजार रुपये की राहत देगी।
50 लाख रुपए के होम लोन पर कितनी होगी बचत?
मानिए कि किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपए का होम लोन लिया है और उसकी अवधि 20 साल है। पहले ब्याज दर 9% थी, जिस आधार पर EMI लगभग 44,960 रुपए प्रति माह आती थी। अगर, अब ब्याज दर घटकर 8.75% हो जाती है, तो EMI लगभग 44,125 रुपए प्रति माह होगी। मतलब हर महीने करीब 835 रुपए की बचत होगी।
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रेपो रेट में 9 जून 2025 में की थी कटौती
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 9 जून 2025 को रेपो रेट में कटौती की थी। इसके बाद रेपो दर 5.50% पहुंच गई थी। उसके बाद अब तक रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की गई है। फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत है। इससे पहले आरबीआई (RBI) ने पिछली बार 9 अप्रैल 2025 को रेपो दर को 6.25% से घटाकर 6% किया था। बता दें, रेपो रेट कम किए जाने से नए लोन लेना भी आसान हो जाते हैं। लोग और कंपनियां कम ब्याज दर से अधिक खर्च करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। उद्योगों को कम ब्याज दर पर पैसा मिलता है, जिससे वे व्यवसाय में अधिक निवेश कर पाते हैं। कम खर्च और अधिक मांग के कारण यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
