अल नीनो का असर तय; मौसम ही नहीं बल्कि बाजार भी करेगा परेशान, जानें रिपोर्ट में क्या कहा गया ?
Weather Alert: जून- अगस्त के दौरान एल नीनो की घटना होने की संभावना के कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभवना 90 प्रतिशत जताई जा रही है। इसके साथ ही सब्जियों की आवक के आकड़े भी संतोषजनक है।
- Written By: वंदना शर्मा
बदलते मौसम में किसान खेत में काम करते हुए (सोर्स सोशल मीडिया)
El Nino Impact: जून- अगस्त के दौरान एल नीनो की घटना होने की संभावना के कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभवना 90 प्रतिशत जताई जा रही है। देश में जलाशयों का स्तर सामान्य रूप से अधिक है, और इसके साथ ही सब्जियों की आवक के आकड़े भी संतोषजनक है।
अल नीनो की बढ़ती संभावना
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में पता चलेगा कि सप्लाई की स्थिति ऐसी है,जो सब्जियों और ईंधनों की कीमतों में होने वाले बदलावों को संभाल पाएगी या नहीं। अर्थशास्त्री दीपान्वीता मजूमदार के बताया है, कि वर्ष 2027 में सीपीआई महंगाई की दर 5.2 से लेकर 5.5 प्रतिशत होने की संभावना है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि अल नीनो के कुछ असर कच्चे तेल की कीमत पर भी पड़ेंगे।
जिससे कच्चे तेल की कीमत लगभग 90 से 100 डॉलर रहने की संभावना है। मई 2020 में महंगाई की दर 3.9 प्रतिशत बनी हुई है। जो बीओबी के रिसर्च के अनुसार 4.1से कम थी। लेकिन अब अप्रैल में 3.5 से ज्यादा हो गई थी। इस महंगाई की मुख्य वजह खाने-पीने की चीजें और ईंधनों की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी थी। खाने पीने की चीजों पर महंगाई दर पहले से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई है।
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ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर में बढ़ोतरी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में बढ़े पेट्रोल और डीजल कीमतों के कारण ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर भी बढ़ी और साथ ही रहने-ठहरने की सेवाओं की महंगाई दर पर भी असर डालती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में बढ़े पेट्रोल और डीजल कीमतों के कारण ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर भी बढ़ी और साथ ही रहने-ठहरने की सेवाओं की महंगाई दर पर भी असर डालती है।
खाने-पीने की चीजों और ईंधनों को छोड़कर महगाई दर बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई है। बता दें। बीओबी रिसर्च को ईंधन को की बढ़ती कीमतों और मौसम से जुड़ी अनिश्चितयाओं, खासकर अल नीनो के कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना से महंगाई का असर नजर आ रहा है।
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कंपनियों इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी
बता दें, कि खाने पीने की चीजों पर बढ़ रही कीमतों के मामले में ईंधनों की बढ़ती कीमतों का असर और फ्रेट की लागत में भविष्य में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कोर महंगाई की दर में बढ़ोतरी का खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। मांग स्थिर रहने के कारण कंपनियों इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी के बोझ में ग्राहकों की कमर टूट गई है।
