

Why Share Market Crash On Wednesday: भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से लगातार जारी तेजी पर बुधवार, 8 जुलाई को ब्रेक लग गया। जहां मार्केट के शुरुआत के साथ ही दोनों प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखी गई। कारोबार के दौरान एक समय बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) करीबी 2,000 अंकों तक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) दिन के सर्वाधिक 593.5 अंक (करीब 2.4% से अधिक) टूटकर 23,805.20 के निचले स्तर पर आ गया था।
बीएसई सेंसेक्स 1,677.12 पॉइंट्स या 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी-50 516.65 पॉइंट्स या 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,882.05 पर बंद हुआ। मार्केट का दायरा कमजोर रहा, जिसमें फाइनेंशियल, FMCG, ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक और हेल्थकेयर स्टॉक्स में नुकसान हुआ। रियल्टी उन कुछ सेक्टर्स में से एक था जो पॉजिटिव टेरिटरी में ट्रेड कर रहे थे।
इस बिकवाली से बहुत कम स्टॉक बचे। सेंसेक्स में शामिल स्टॉक्स में ट्रेंट सिर्फ 0.17 प्रतिशत गिरा, उसके बाद इंफोसिस में 0.21 प्रतिशत की गिरावर रही, टाइटन 0.34 प्रतिशत टूटा। जबकि सन फार्मा 0.75 प्रतिशत और टाटा स्टील 0.87 प्रतिशत गिरकर कारोबार कर रहे थे। जिसकी वजह से वे दिन के सबसे मजबूत परफॉर्मर बन गए। दूसरी तरफ इंडिगो 5.02 प्रतिशत गिरा, जो सबसे बड़ा लूजर बनकर उभरा।
इसके बाद मारुति सुजुकी के शेयरों में 4.11 प्रतिशत, हिंदुस्तान यूनिलीवर 3.32 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 3.08 प्रतिशत, कोटक महिंद्रा बैंक 2.93 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा 2.85 प्रतिशत, आईटीसी 2.82 प्रतिशत, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 2.70 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.35 प्रतिशत टूटकर बंद हुए।
वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा: अमेरिका के ईरान पर नए हमले करने के बाद निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ, जिससे जियोपॉलिटिकल चिंताएं फिर से बढ़ गईं। होर्मुज स्ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले के बाद वाशिंगटन ने ईरान का तेल एक्सपोर्ट करने का लाइसेंस रद्द कर दिया, जिससे मौजूदा सीजफायर के बावजूद सप्लाई में रुकावट का डर बढ़ गया। यह तेज गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा, तुर्की में NATO समिट में रिपोर्टरों से कहा कि हमने कल रात ईरान के बहुत खतरनाक लोगों पर बहुत जोरदार हमला किया। ट्रंप ने आगे कहा कि वे (ईरान) बीमार हैं, उनके साथ कुछ गड़बड़ है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह खत्म हो गया है।
क्रूड ऑयल में बढ़त जारी: इसके बाद, ब्रेंट क्रूड ऑयल 4.25% बढ़कर $77.31 प्रति बैरल हो गया, जबकि WTI क्रूड 4.22% बढ़कर $73.41 प्रति बैरल हो गया। तेल की बढ़ती कीमतों को आम तौर पर भारत के लिए बुरा माना जाता है, जो कच्चे तेल के इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है, क्योंकि इससे इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है, महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और कारोबार के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है।
उतार-चढ़ाव में तेज़ी: इंडिया VIX, जिसे अक्सर मार्केट का डर का पैमाना कहा जाता है वह 25.62 प्रतिशत बढ़कर 14.58 पर पहुच गया, जो मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता और पार्टिसिपेंट्स के बीच सावधानी बरतने का संकेत देता है।
ग्लोबल मार्केट पर दबाव: एशियाई इक्विटी में गिरावट रही, जिसमें जापान का निक्केई 225 और साउथ कोरिया का कोस्पी नुकसान में रहे। वॉल स्ट्रीट से कमजोर रुख, जहां US स्टॉक रात भर नीचे बंद हुए, ने भी निवेशकों का भरोसा कम किया।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर: शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर 95.16 पर आ गया। डीलर्स ने इस गिरावट की वजह बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US डॉलर का मजबूत होना बताया, जबकि कमजोर घरेलू इक्विटी मार्केट ने लोकल करेंसी पर और दबाव डाला।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग में एसवीपी अजीत मिश्रा का कहना है कि निफ्टी 24000-,24,150 के अपने सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है। यह अपने प्रमुख मूविंग एवरेजेज से भी नीचे हैं। इससे शॉर्ट टर्म में इसका टेक्निकल स्ट्रक्चर कमजोर लगता है। उन्होंने कहा कि अगला सपोर्ट 23,650-23,800 जोन में है। तेजी की स्थिति में निफ्टी को 24,150-24,300 जोन में रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा।