Credit Card धारक की मृत्यु के बाद कैसे होती है बकाया बिल की वसूली? जानें बैंक के नियम
Cardholder Death Dues: क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु होने पर बैंक बकाया बिल की वसूली मृतक की संपत्ति या निवेश से करता है। अगर कोई संपत्ति नहीं है, तो बैंक इस बकाया राशि का खुद नुकसान झेलता है।
- Written By: प्रिया सिंह
क्रेडिट कार्ड (सोर्स-सोशल मीडिया)
Credit Card Bill Recovery After Death: आजकल रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक के लालच में क्रेडिट कार्ड का उपयोग काफी बढ़ गया है, जो उपभोक्ताओं को पहले खर्च और बाद में भुगतान की सुविधा देता है। हालांकि, अगर किसी कार्ड धारक की भुगतान करने से पहले ही मृत्यु हो जाए, तो उसके बकाया बिल की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर परिवार असमंजस में रहता है। सामान्यतः बैंक इस बकाया राशि की वसूली के लिए एक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हैं जिसमें मृतक की संपत्तियों का आकलन किया जाता है। आइये जानते हैं कि क्या ऐसी स्थिति में परिवार को भुगतान करना पड़ता है या बैंक खुद नुकसान वहन करता है।
संपत्ति से बिल की वसूली
अगर क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक बकाया राशि की वसूली मृतक के नाम पर मौजूद निवेश, बैंक बैलेंस या किसी अन्य चल-अचल संपत्ति से करता है। कानूनन बैंक इस कर्ज का बोझ सीधे तौर पर परिवार के सदस्यों या कानूनी वारिसों पर नहीं डाल सकता है, क्योंकि क्रेडिट कार्ड एक असुरक्षित ऋण है। बैंक केवल मृतक की छोड़ी गई वसीयत या संपत्ति के जरिए ही अपना पैसा वापस पाने की कोशिश करता है।
जब संपत्ति कम पड़ जाए
ऐसी स्थिति में जहां मृतक के पास कोई संपत्ति नहीं है या संपत्ति की कुल कीमत क्रेडिट कार्ड के बकाया बिल से कम है, बैंक परिवार को मजबूर नहीं कर सकता। बकाया राशि का वह हिस्सा जो संपत्ति से वसूल नहीं हो पाता, उसे बैंक अपनी बैलेंस शीट में ‘बैड डेट’ या नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) मानकर बट्टे खाते में डाल देता है। इसका मतलब है कि शेष राशि का नुकसान बैंक को स्वयं उठाना पड़ता है और खाता बंद कर दिया जाता है।
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क्रेडिट लिमिट तय करने का आधार
बैंक किसी भी ग्राहक की क्रेडिट कार्ड लिमिट तय करने से पहले उसकी मासिक आय और नौकरी की स्थिरता की गहराई से जांच करता है। आय का स्तर यह सुनिश्चित करता है कि कार्ड धारक भविष्य में लिए गए उधार को समय पर चुकाने में सक्षम होगा या नहीं। अगर नौकरी सरकारी है या प्रतिष्ठित कंपनी में है, तो बैंक अक्सर ग्राहक को अधिक लिमिट और बेहतर सुविधाएं देने को प्राथमिकता देते हैं।
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क्रेडिट स्कोर और खर्च का पैटर्न
लिमिट तय करने में क्रेडिट स्कोर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो व्यक्ति की पिछली उधार चुकाने की क्षमता और व्यवहार को दर्शाता है। एक अच्छा सिबिल स्कोर न केवल क्रेडिट लिमिट बढ़ाता है, बल्कि ब्याज दरों में भी राहत दिलाने में सहायक होता है। बैंक ग्राहक के खर्च करने के पैटर्न का भी विश्लेषण करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि कार्ड का उपयोग जिम्मेदारी से किया जा रहा है या नहीं।
