Share Market Crash: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, निवेशकों में युद्ध से बड़ा डर
Share Market Crash: 4 मार्च 2026 को मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण शेयर बाजार धराशायी हो गया। सेंसेक्स 1,644 अंक से ज्यादा गिरा और निफ्टी 24,400 के नीचे चला गया जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया।
- Written By: प्रिया सिंह
शेयर मार्केट, (प्रतीकात्मक तस्वीर)
US Israel Iran War Impact On Indian Share Market: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध और बढ़ते तनाव के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली और अफरा-तफरी का माहौल रहा। बुधवार की सुबह निवेशकों के लिए किसी डरावने सपने जैसी रही जब बाजार खुलते ही गहरे लाल निशान में डूब गया। बढ़ते संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट पर भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। युद्ध की इस तपिश ने आम आदमी की बचत और उनके निवेश पर गहरा प्रहार किया है जिससे हर कोई अब बहुत चिंतित है।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार कोहराम
आज सुबह 9:16 बजे सेंसेक्स 1,644 अंक गिरकर 78,594.94 के स्तर पर आ गया जो कि 2.05 प्रतिशत की एक बड़ी गिरावट है। निफ्टी 50 भी बिकवाली के दबाव में पीछे नहीं रहा और इसमें 1.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जिससे यह 24,380.45 पर आ गया। बाजार के जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर निफ्टी 24,400 के नीचे बना रहता है तो गिरावट का यह खतरनाक दौर आगे भी चलेगा।
युद्ध और कच्चे तेल का गहराता संकट
ईरान द्वारा बहरीन में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमलों और इजरायल की लेबनान में भीषण बमबारी ने वैश्विक निवेशकों को पूरी तरह डरा दिया है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञ डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार इस अनिश्चितता के दौर में व्यापार घाटा बढ़ने और देश की आर्थिक विकास दर धीमी होने की आशंका है।
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निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की जरूरी सलाह
बाजार की इस ऐतिहासिक गिरावट और अनिश्चितता के बीच अनुभवी विशेषज्ञों ने सभी निवेशकों को धैर्य और शांति बनाए रखने की महत्वपूर्ण सलाह दी है। उनका कहना है कि घबराकर बाजार से बाहर निकलना गलत फैसला हो सकता है क्योंकि बाजार अक्सर बड़े झटकों के बाद दोबारा मजबूती से वापसी करते हैं। लंबे समय के नजरिए से बैंकिंग, फार्मा और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश के अच्छे अवसर बन सकते हैं जिन्हें समझदारी से चुनना चाहिए।
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वैश्विक बाजारों पर युद्ध का प्रतिकूल असर
भारतीय बाजार के साथ-साथ अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी गिरावट का सिलसिला आज तीसरे दिन भी लगातार पूरी तेजी के साथ जारी रहा। सुरक्षित निवेश के रूप में अब सोने की मांग काफी बढ़ गई है जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 1 प्रतिशत तक उछल गईं। डॉलर के तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से विदेशी निवेशकों ने यूरो जैसी अन्य मुद्राओं से दूरी बनाना और अपनी पूंजी निकालना शुरू कर दिया है।
