बजट 2024: डिफेंस सेक्टर पर होगा सरकार का फोकस, किए जाएंगे खास प्रावधान
केन्द्र की मोदी सरकार 23 जुलाई को अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेगी। इस बजट में डिफेंस सेक्टर पर सरकार ज्यादा फोकस कर सकती है, और रक्षा बजट को अतिरिक्त राशि प्रदान कर सकती है। इसके पीछे पर्याप्त कारण भी हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
बजट 2024 में रक्षा क्षेत्र पर होगा फोकस (कॉन्सेप्ट फोटो)
नई दिल्ली : केन्द्र की मोदी सरकार 23 जुलाई को अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेगी। इस बजट में डिफेंस सेक्टर पर सरकार ज्यादा फोकस कर सकती है, और रक्षा बजट को अतिरिक्त राशि प्रदान कर सकती है। इसके पीछे पर्याप्त कारण भी हैं।
22 जुलाई को संसद का बजट सत्र भी शुरू होने जा रहा है। जिसके ठीक एक दिन बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण मोदी 3.0 का पहला आम बजट पेश करेंगी। इस बजट से रक्षा सेक्टर को अधिक राशि मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह 13 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी तक किया जा सकता है।
पिछले 10 साल में हुई बढ़ोतरी
मोदी सरकार ने पिछले 10 साल में लगातार इसमें बढ़ोतरी भी की है। 2014 में रक्षा बजट 2 लाख 29 हजार करोड़ था जो कि 2023 में बढ़कर 5 लाख 93 हजार 500 करोड़ हो गया। वहीं 2024 के अंतरिम बजट में 6 लाख 21 हजार करोड़ की राशि देने का ऐलान किया गया था। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार रक्षा बजट को और बढ़ाया जा सकता है।
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राजनाथ सिंह का बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2023 में कहा था कि 2047 तक जब हम आजादी के 100 साल मनाएंगे, तब एक विकसित देश बनने के लिए भारत को आधुनिक उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की आवश्यकता है। इस बयान को इनडायरेक्टली ज्यादा बजट की डिमांड से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी राष्ट्री सुरक्षा को चुनावी मुद्दा भी बनाती रही है। जिसमें बजट में रक्षा सेक्टर को दी गई राशि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डिफेंस सेक्टर की उम्मीद
मोदी 3.0 चल रहा है और रक्षा क्षेत्र उम्मीद कर रहा है कि सरकार को हर साल केंद्र सरकार के कुल खर्च का कम से कम 25 फीसदी डिफेंस पर खर्च करना चाहिए। 2024 के अंतरिम बजट पर नजर डालें तो यह मात्रा 13.04 फीसदी था। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार इस बार को मांग के अनुरूप नहीं फिर भी रक्षा बजट को 20 फीसदी के आस-पास रख सकती है।
चीन की चुनौती और पाकिस्तान
भारत के पड़ोसी राज्यों में चीन और पाकिस्तान से हमेशा ही तना-तनी बनी रहती है। एलएसी पर चीन अपने ख़तरनाक मंसूबे जाहिर करता रहता है तो एलओसी पर पाकिस्तान। ऐसे में रक्षा बजट को बढ़ाकर भारत सेना को और सशक्त करना चाहेगा जिससे समय आने पर देश के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
