स्टार्टअप्स के लिए आयकर छूट (सोर्स-AI डिज़ाइन)
Startup tax holiday extension Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं ने भारत के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम में नई ऊर्जा भर दी है। वित्त मंत्री ने नए व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए ‘टैक्स हॉलिडे’ की अवधि को आगे बढ़ाने और अनुपालन नियमों को सरल बनाने की घोषणा की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और ‘विकसित भारत’ के विजन को गति देना है। अब नए स्टार्टअप्स को शुरुआती वर्षों में टैक्स की चिंता किए बिना अपने विस्तार और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
बजट 2026 में सरकार पात्र स्टार्टअप्स के लिए आयकर छूट (Tax Holiday) की समय सीमा को बढ़ा सकती है। अब 31 मार्च 2030 तक निगमित होने वाले स्टार्टअप्स धारा 80-IAC के तहत अपनी स्थापना के पहले 10 वर्षों में से किन्हीं लगातार 3 वर्षों के लिए 100% टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। यह छूट उन व्यवसायों के लिए संजीवनी का काम करेगी जो अपने शुरुआती चरण में नकदी संकट और परिचालन लागत से जूझते रहते हैं।
स्टार्टअप्स की सबसे बड़ी चुनौती ‘पूंजी’ को हल करने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी स्कीम में बड़ा बदलाव किया है। अब स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ किया जा सकता है, जिसमें गारंटी शुल्क को घटाकर 1% किया जा सकता है। साथ ही पहली बार बिजनेस शुरू करने वाले 5 लाख युवाओं के लिए विशेष ‘टर्म लोन’ योजना की शुरुआत की गई है, जो 2 करोड़ तक का ऋण आसान शर्तों पर प्रदान करेगी।
निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार एंजेल टैक्स के नियमों को और अधिक उदार बनाने जा रही है। स्टार्टअप्स अब बिना किसी जटिल कर प्रक्रिया के 25 करोड़ तक का कुल निवेश (Paid-up capital and premium) प्राप्त करने पर धारा 56 के तहत छूट पा सकते हैं। इस कदम से न केवल घरेलू निवेशकों बल्कि विदेशी वेंचर कैपिटलिस्टों का भरोसा भी बढ़ेगा, जिससे भारत के छोटे शहरों में भी स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार संभव हो पाएगा।
MSME और सूक्ष्म स्टार्टअप्स के लिए GST पंजीकरण की सीमा और अनुपालन नियमों में बड़ी राहत की मांग को बजट में स्थान मिला है। स्टार्टअप नेताओं के सुझावों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण सीमा को 20 लाख से बढ़ाने और रिफंड प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा अनजाने में हुई प्रक्रियात्मक त्रुटियों के लिए दंड को कम करके व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को प्राथमिकता दी गई है।
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भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग से 10,000 करोड़ का ‘फंड ऑफ फंड्स’ आवंटित किया है। इस विशेष फंड का उपयोग सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और AI मिशन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले नए व्यवसायों को अनुदान देने के लिए किया जाएगा। यह निवेश न केवल वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी प्रतिभा को स्थापित करेगा बल्कि नए रोजगार के लाखों अवसर भी सृजित करेगा।