सावधान! कहीं आप भी तो नहीं बेच रहे अपनी ‘आजादी’? जानें कैसे आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम छीन रहा EMI का जाल
Side Effects of EMI: बीएनपीएल जैसी स्कीम आपको आज खरीदारी करने का लालच देती है, लेकिन यह आपकी भविष्य की कमाई को पहले ही ब्लॉक कर देती है। खर्च करने से पहले जानें ये जरूरी बात।
- Written By: मनोज आर्या
कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- AI)
Financial Freedom vs Debt Trap: आजकल इलेक्ट्रॉनिक सामान हो या महंगे कपड़े, सबकुछ ईएमआई या ‘बाय नाउ पे लेटर’ (BNPL) पर आसानी से मिल जाता है। कभी मजबूरी में लिए जाने वाला कर्ज, आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। धीर-धीरे यह लोगों का फाइनेंशियल फ्रीडम छीन रहा है।
भारत में ग्रांट थॉर्नटन के पार्टनर विवेक अय्यर के अनुसार, क्रेडिट का असली मकसद सैलरीड वर्ग को थोड़ी लिक्विडिटी उपलब्ध करना था ताकि, वे अपनी जरूरत को पूरी कर सकें। लेकिन अब लोग जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि मार्केट की चौकाचौंध में आकर क्षमता से अधिक खर्च कर रहे हैं।
क्या है सिस्टमेटिक रिस्क?
जब लोग अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज लेने लगते हैं और बैंक भी बिना सोचे-समझे कर्ज बांटने लगते हैं, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है। इसे ‘सिस्टमेटिक रिस्क’ कहा जाता है।
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बचत और निवेश का संतुलन
बीएनपीएल जैसी स्कीम आपको आज खरीदारी करने का लालच देती है, लेकिन यह आपकी भविष्य की कमाई को पहले ही ब्लॉक कर देती है। अय्यर के मुताबिक, तेजी से बढ़ता उपभोक्तावाद अब बचत और निवेश का संतुलन खराब कर रहा है। अब अधिकतर लोग भविष्य के लिए पैसा बचाने या निवेश करने के बजाय आज की जरूरतों और सुविधाओं को ज्यादा अहमियत देने लगे हैं।
वित्तीय आजादी के लिए विवेक अय्यर एक पुराना और असरदार फॉर्मूला अपनाने पर जोर देते हैं। वो ये है…
- 50 प्रतिशत- जरूरी खर्चे (खाना, किराया, कपड़े)
- 30 प्रतिशत- निवेश (भविष्य के लिए))
- 20 प्रतिशत- इमरजेंसी फंड (बड़ी मुसीबत से बचाव)
आपने जो लोन लिया है, यदि उसकी कुल ईएमआई इतनी ज्यादा है कि वह आपके 30 फीसदी निवेश या 20 फीसदी इमरजेंसी फंड वाले हिस्से को खा रही है, तो समझ लीजिए कि आप धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
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कैसे छिन रही आपकी आजादी?
अय्यर कहते हैं कि असल अमीरी बैंक बैलेंस और निवेश से बनती है, न कि उन चीजों से जो आपने उधार के पैसों से खरीदी हों। वे कहते हैं कि क्रेडिट एक टूल है, सही इस्तेमाल करेंगे को तरक्की मिलेगी, गलत तरीके से खर्च करेंगे तो आजादी छिन जाएगी। अगली बार चेकआउट बटन दबाने से पहले खुद से पूछें- क्या यह चीज वाकई जरूरी है या आप इसके बदले भविष्य की शांति बेच रहे हैं।
