इनकम टैक्स नहीं भरने वालों के लिए भी क्यों जरूरी है बजट देखना? (सोर्स-सोशल मीडिया)
Importance for non taxpayers: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं। आम तौर पर लोग सोचते हैं कि बजट केवल इनकम टैक्स भरने वालों के लिए है। लेकिन अर्थशास्त्री अरुण कुमार के अनुसार यह धारणा पूरी तरह से गलत और अधूरी है। बजट का सीधा संबंध आम आदमी की थाली, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं से है।
बजट देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इकोनॉमिक इवेंट होता है जिसका असर हर नागरिक पर पड़ता है। इसका सीधा संबंध इस बात से है कि आने वाले साल में अर्थव्यवस्था में कितना नया रोजगार पैदा होगा। भले ही आप टैक्स स्लैब में न आएं, लेकिन चीजों के दाम बजट की नीतियों से ही तय होते हैं।
एक हाउसवाइफ के लिए बजट का मतलब उसकी रसोई के सामान जैसे तेल और साबुन के दाम हैं। इनडायरेक्ट टैक्स में होने वाले बदलावों का सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पूरी तरह पड़ता है। दाम बढ़ने पर गृहिणियों को खाने-पीने की वस्तुओं या बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में कटौती करनी पड़ती है।
बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया जाने वाला खर्च सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता को तय करता है। ज्यादा आवंटन का मतलब है कि आम आदमी को सरकारी अस्पतालों और स्कूलों में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सड़कों और रेलवे पर होने वाला खर्च भी ट्रांसपोर्टेशन की लागत और आम जनता की सुविधा को प्रभावित करता है।
आज के समय में गिग वर्कर्स की तादाद बहुत बढ़ गई है जिनके पास कोई फिक्स सैलरी नहीं होती। बजट की नीतियां यह तय करती हैं कि असंगठित क्षेत्र में रोजगार और सोशल सिक्योरिटी की क्या स्थिति होगी। बेहतर बजट का मतलब है कि गिग वर्कर्स को भविष्य में बेहतर रोजगार और पीएफ जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
यद्यपि ब्याज दरें रिजर्व बैंक तय करता है, लेकिन बजट की नीतियां मुद्रास्फीति यानी महंगाई को प्रभावित करती हैं। अगर बजट के कारण महंगाई बढ़ती है, तो RBI को मजबूरन ब्याज दरों में बदलाव करना पड़ता है। इसका सीधा असर पोस्ट ऑफिस और छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले गरीब तबके पर होता है।
गरीब तबके के लिए राशन और गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी जीवन निर्वाह का मुख्य आधार है। बजट में सब्सिडी का आवंटन कम या ज्यादा होने से आम आदमी की जेब पर तुरंत असर दिखता है। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत करोड़ों लोग जो 10 हजार से कम कमाते हैं, उनके लिए यह बहुत जरूरी है।
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ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 90 प्रतिशत लोग 10 हजार रुपये से कम मासिक आमदनी पर गुजारा कर रहे हैं। अगर बजट में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं होतीं, तो बीमारी की स्थिति में इन्हें भारी कर्ज लेना पड़ता है। इसलिए बजट में मिलने वाली राहत इन परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे जाने से बचाने में मदद करती है।
कम आमदनी वालों को निर्मला सीतारमण के भाषण में रोजगार और महंगाई की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। उन्हें यह देखना चाहिए कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सरकार ने क्या नए बजटीय प्रावधान किए हैं। इन चीजों पर ध्यान देकर ही एक आम आदमी अपना भविष्य का बजट सही ढंग से प्लान कर सकता है।
Ans: नहीं, बजट का असर रोजगार और महंगाई के जरिए हर उस व्यक्ति पर पड़ता है जो टैक्स नहीं भरता है।
Ans: इनडायरेक्ट टैक्स में बदलाव से तेल, साबुन और राशन के दाम घटते या बढ़ते हैं, जो रसोई बजट बदल सकते हैं।
Ans: बजट यह निर्धारित करता है कि असंगठित क्षेत्र में कितनी सोशल सिक्योरिटी और सुरक्षित रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
Ans: बजट सीधे दरें तय नहीं करता, लेकिन इसकी नीतियों से महंगाई बढ़ने पर RBI को ब्याज दरें बदलनी पड़ती हैं।
Ans: राशन और गैस की सब्सिडी कम होने से कम आय वाले परिवारों का खर्च बढ़ता है और कर्ज का जोखिम रहता है।