Budget 2026: 1991 का वह ऐतिहासिक बजट जिसने बदल दी भारत की किस्मत, जानें लाइसेंस राज के अंत की कहानी
1991 Budget Story: 1991 का बजट भारत के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था जिसने लाइसेंस राज खत्म कर विदेशी निवेश के रास्ते खोले। डॉ. मनमोहन सिंह के इस बजट ने डूबती अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
- Written By: प्रिया सिंह
1991 का बजट, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (सोर्स - सोशल मीडिया)
Historic 1991 Indian Economic Reforms: साल 2026 का बजट 1 फरवरी को पेश होने वाला है और यह निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट होगा। इस समय देश में 1991 के उस ऐतिहासिक बजट की चर्चा फिर से तेज हो गई है जिसने भारत की दिशा बदल दी थी। 1991 से पहले भारत एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने जोखिम उठाकर एक ऐसा रोडमैप तैयार किया जिसने देश को आत्मनिर्भर बनाया।
आर्थिक संकट का दौर
भारत की अर्थव्यवस्था 1991 से पहले बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गई थी जहां विदेशी मुद्रा की भारी कमी थी। हालात इतने खराब थे कि सरकार को सोना गिरवी रखने की नौबत आई और महंगाई के साथ बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख कमजोर हो चुकी थी और आयात के लिए केवल कुछ हफ्तों का पैसा बचा था।
साहसिक फैसले की शुरुआत
प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पुराने ढर्रे को छोड़कर साहसिक सुधारों का रास्ता चुना। उन्होंने देश को आर्थिक संकट से निकालने के लिए एक ठोस रोडमैप पेश किया जिसे आज भी सम्मान से याद किया जाता है। यह फैसला सिर्फ बजट का हिस्सा नहीं था बल्कि भारत के आत्मविश्वास की वापसी का एक बहुत बड़ा जरिया बना था।
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लाइसेंस राज का खात्मा
इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता लाइसेंस राज का अंत करना था जिसने उद्योगों को सरकारी बंदिशों से पूरी तरह आजाद किया। पहले कोई भी उद्योग शुरू करने के लिए मंजूरी लेना जरूरी था जिससे भ्रष्टाचार और काम में देरी आम बात हो गई थी। इससे निजी क्षेत्र को नई ताकत मिली और कंपनियों को खुद फैसले लेने तथा बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की आजादी मिली।
विदेशी निवेश का आगाज
1991 के बजट में पहली बार विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने की खुली छूट देने का बड़ा निर्णय लिया गया। सीमा शुल्क को 220 प्रतिशत से घटाकर करीब 150 प्रतिशत कर दिया गया जिससे भारत के आयात-निर्यात को काफी बढ़ावा मिला। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ा और भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह फिर से बहुत तेज होने लगा।
परिवर्तनकारी प्रभाव
बाकी बजट केवल सुधारात्मक थे जबकि 1991 का बजट पूरी तरह से परिवर्तनकारी साबित हुआ जिसने देश की आर्थिक सोच बदल दी। इसके बाद सरकारी खजाने में पैसा आने लगा और निर्यात बढ़ने से देश में रोजगार के अनगिनत नए अवसर पैदा होने लगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सुधार न होते तो भारत की हालत कई अन्य कमजोर अर्थव्यवस्थाओं जैसी हो सकती थी।
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भविष्य की राह
1991 के बाद से ही देश का निजी क्षेत्र फला-फूला और भारत वैश्विक मंच पर एक उभरती हुई आर्थिक ताकत बना। आज जब 1 फरवरी 2026 को नया बजट पेश होगा तो लोग फिर से उसी तरह के बड़े बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं। निर्मला सीतारमण का यह बजट 1991 की प्रेरणा के साथ देश को विकसित बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम हो सकता है।
Frequently Asked Questions
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Que: 1991 के बजट को भारतीय अर्थव्यवस्था का टर्निंग पॉइंट क्यों कहा जाता है?
Ans: क्योंकि इस बजट ने लाइसेंस राज को खत्म किया और विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोलकर पूरी आर्थिक सोच बदल दी।
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Que: 1991 के संकट के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
Ans: विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम था कि केवल कुछ हफ्तों का आयात संभव था और सरकार को सोना गिरवी रखना पड़ा था।
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Que: लाइसेंस राज खत्म होने से भारतीय उद्योगों को क्या लाभ हुआ?
Ans: उद्योगों को सरकारी मंजूरी की बाधाओं से आजादी मिली, जिससे वे खुद फैसले लेने और उत्पादन बढ़ाने में सक्षम हुए।
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Que: 1991 के बजट में सीमा शुल्क (Customs Duty) में क्या बदलाव किए गए थे?
Ans: सीमा शुल्क को 220 प्रतिशत की भारी दर से घटाकर करीब 150 प्रतिशत कर दिया गया था जिससे व्यापार आसान हुआ।
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Que: बजट 2026 को कौन पेश करेगा और इसमें किसकी झलक दिख सकती है?
Ans: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे 1 फरवरी को पेश करेंगी और इसमें 1991 जैसे बड़े सुधारों की उम्मीद की जा रही है।
