Budget 2026: क्या इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी होगी सस्ती? टैक्स कटौती और सब्सिडी पर टिकी सबकी नजर

EV Battery Tax Cut: बजट 2026 में ईवी बैटरी सस्ती करने के लिए GST और आयात शुल्क में कटौती की उम्मीद है। पीएम ई-ड्राइव और PLI स्कीम के विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
Budget 2026 Will EV Batteries Get Cheaper? Expectations Rise for Tax Cuts and Incentives
बजट 2026 में ईवी बैटरी सस्ती करने के लिए GST और आयात शुल्क में कटौती की उम्मीद (सोर्स-सोशल मीडिया)
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GST Reduction on EV batteries 2026 India: आगामी केंद्रीय बजट 2026 में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को वित्त मंत्री से बड़ी उम्मीदें हैं, विशेष रूप से बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए करों में कटौती की मांग की जा रही है। वर्तमान में ईवी की कुल लागत में बैटरी का हिस्सा लगभग 40% है, जिसे कम किए बिना इलेक्ट्रिक वाहनों को आम आदमी की पहुंच में लाना चुनौतीपूर्ण है।

उद्योग जगत ने लिथियम-आयन सेल और कच्चे माल पर आयात शुल्क घटाने के साथ-साथ बैटरी चार्जिंग और स्वैपिंग सेवाओं पर GST को 18% से घटाकर 5% करने का सुझाव दिया है। भारत सरकार 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री का लक्ष्य रख रही है, जिसके लिए बजट में बैटरी इकोसिस्टम को मजबूत करना एक अनिवार्य कदम साबित हो सकता है।

बैटरी पर टैक्स का बोझ

वर्तमान में EV की खरीद पर केवल 5% GST लगता है, लेकिन बैटरी और संबंधित उपकरणों पर यह दर 18% तक जा सकती है, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट का संतुलन बिगड़ता है। बजट 2026 में विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार इन दरों में एकरूपता लाने के लिए बैटरी पर लगने वाले कर को कम कर सकती है। इससे न केवल वाहनों की निर्माण लागत कम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए अंतिम शोरूम कीमत में भी भारी कमी देखी जा सकेगी।

PLI और सब्सिडी योजना

सरकार ने पहले ही 'पीएम ई-ड्राइव' योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो फेम-2 योजना के बाद लागू की गई है। बजट 2026 में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के दायरे को बढ़ाने की मांग की जा रही है ताकि घरेलू उत्पादन को गति मिल सके। अगर सरकार घरेलू स्तर पर सेल निर्माण को प्रोत्साहित करती है, तो आयात पर निर्भरता कम होगी और बैटरी की कीमतें स्थिर होंगी।

कच्चे माल पर सीमा शुल्क

इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी के लिए आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क में और कटौती की संभावना जताई जा रही है। पिछले बजट में भी कुछ खनिजों पर रियायत दी गई थी, लेकिन उद्योग जगत इस बार पूरी तरह छूट की उम्मीद कर रहा है ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं से बचा जा सके। कच्चे माल की लागत कम होने से भारतीय बैटरी निर्माता वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन पाएंगे।

चार्जिंग और स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

बैटरी-एज़-ए-सर्विस (BaaS) मॉडल को बढ़ावा देने के लिए बैटरी स्वैपिंग पर लगने वाले 18% जीएसटी को घटाकर 5% करना एक प्रमुख मांग बन चुका है। इंडिगो और टाटा मोटर्स जैसे बड़े खिलाड़ी इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं, लेकिन उच्च कर दरें उनके विस्तार में बाधा डाल रही हैं। बजट में अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान होता है, तो इससे रेंज की चिंता कम होगी।

भविष्य की संभावनाएं

सरकार 2026 तक भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों का वैश्विक हब बनाने के लिए रिसाइकिलिंग और सर्कुलर इकोनॉमी पर भी ध्यान केंद्रित कर सकती है। पुरानी बैटरियों के सुरक्षित निपटान और पुनः उपयोग के लिए नई प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की जा सकती है, जिससे लंबी अवधि में लागत कम होगी। यह बजट तय करेगा कि भारत में इलेक्ट्रिक क्रांति की गति क्या होगी और क्या मध्यम वर्ग के लिए क्लीन मोबिलिटी का सपना सच हो पाएगा।

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