निर्मला सीतारमण, (वित्त मंत्री)
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को जब अपने बजट भाषण में नए इनकम टैक्स स्लैब का एलान किया तो सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता हुआ दिखा जिनकी सालाना इनकम 12 लाख रुपये से कम है। सीतारमण ने ऐलान किया कि 12 लाख रुपये तक की इनकम पर एक रुपये का भी टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि, नौकरीपेशा लोगों के लिए ये सीमा बढ़ाकर 12 लाख 75 हज़ार रुपये कर दी गई है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक अगर किसी शख़्स की सैलरी सालाना 13 लाख रुपये है तो उसे नए़ टैक्स स्लैब की वजह से 60 से 70 हज़ार रुपये की टैक्स बचत होगी।
इस ऐसे समझ सकते हैं कि नए टैक्स स्लैब के मुताबिक चार से आठ लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को अब केवल पांच फीसदी टैक्स देना होगा। जबकि, आठ से बारह लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को दस और 12 से 16 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को 15 प्रतिशत टैक्स का भुगतान करना होगा। लेकिन, सरकार 87A के तहत 10 फीसदी तक का इनकम टैक्स सीधे माफ कर देती है।
बता दें कि वर्तमान समय तक 12 से 15 लाख रुपये की सालाना कमाई पर 20 फ़ीसदी टैक्स देना पड़ रहा था। भारत में मिडिल क्लास की परिभाषा के दायरे में वो लोग आते हैं जिनकी सालाना आय 5 से 30 लाख रुपये (2020-21 के मूल्यों के आधार पर) तक है। पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज़ कंज़्यूमर इकोनॉमी के मुताबिक़ फ़िलहाल (2025) देश की आबादी का 40 फ़ीसदी मिडिल क्लास के दायरे में आता है। 2016 में 26 फ़ीसदी लोग मिडिल क्लास के दायरे में आते थे। भारतीय इकॉनमी इस समय मांग की भारी कमी से जूझ रही है। कहा जा रहा है कि चूंकि वस्तुओं और सेवाओं का सबसे बड़ा उपभोक्ता समूह मिडिल क्लास के हाथ में पैसा नहीं बच रहा है इसलिए उसकी ख़रीद क्षमता प्रभावित हुई है और अर्थव्यवस्था में मांग घट गई है।
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चूंकि कंपनियां खपत में कमी देख रही हैं इसलिए वो उत्पादन नहीं बढ़ा रही हैं और न ही नया निवेश कर रही हैं। इसका असर आर्थिक ग्रोथ पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 6.4 फ़ीसदी रही है जो पिछले चार साल की सबसे धीमी ग्रोथ है। आर्थिक सर्वे में 6.3 से लेकर 6.8 फ़ीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है, जो स्लोडाउन की निशानी मानी जा रही है। साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ जो कि मोदी सरकार का लक्ष्य है, को हासिल करने के लिए लगातार कम से कम 8 प्रतिशत ग्रोथ रेट की आवश्यकता है।