अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
Donald Trump Iran Attack Postponement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की योजना टालने के फैसले ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले को पोस्टपोन करने की न्यूज के ठीक पहले वैश्विक बाजारों में भारी मात्रा में सट्टेबाजी देखी गई। ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की पोस्ट आने से महज 15 मिनट पहले तेल और इक्विटी में दनादन सौदे किए गए जिसने विशेषज्ञों को चौंका दिया। इस अचानक आए बदलाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई जबकि वैश्विक शेयर बाजारों में रौनक लौट आई।
ट्रंप के ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद जब हमला टालने की बात आई, तो बाजार में 580 मिलियन डॉलर का दांव लगा। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 5440 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठती है जो तेल की कीमतों को लेकर लगाई गई थी। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार ये सौदे ट्रंप के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट आने से ठीक 15 मिनट पहले किए गए थे।
जैसे ही ट्रंप ने ऊर्जा साइट्स पर हमले के प्लान को 5 दिन के लिए स्थगित करने का पोस्ट किया, तेल कीमतें भरभराकर टूट गईं। कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के भाव में 10% तक की भारी गिरावट देखने को मिली जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी बात है। न्यूयॉर्क के समय के मुताबिक सुबह 6:49 से 6:50 के बीच करीब 6,200 कॉन्ट्रैक्ट्स में भारी सट्टेबाजी की गई थी।
एक तरफ जहां तेल की कीमतें क्रैश हो रही थीं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी तेजी देखी गई। निवेशकों ने पहले ही भांप लिया था कि युद्ध का टलना बाजारों के लिए सकारात्मक होगा और इसी कारण शेयरों में तेजी के सौदे हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति की एक पोस्ट ने बाजार के गिरने के सिलसिले को रोक दिया और दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी आ गई।
बिना किसी बड़े आर्थिक संकेत या डेटा के इतने कम समय में इतने बड़े सौदे होना विशेषज्ञों के लिए काफी असामान्य है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट ने इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में इनसाइडर ट्रेडिंग की गंभीर चिंताओं को जन्म दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन सौदों के पीछे एक खिलाड़ी था या कई, लेकिन इसका समय काफी रहस्यमयी लग रहा है।
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ट्रंप के दावों के विपरीत ईरान की समाचार एजेंसी फार्स ने इसे पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ बताकर खारिज कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। ईरान का मानना है कि इस तरह की फर्जी खबरों का इस्तेमाल केवल तेल और वित्तीय बाजारों में हेरफेर करने के लिए किया गया है।