सुप्रीम कोर्ट ने हमारी मांग पर लगाई मुहर, SIR को लेकर तेजस्वी बोले- लोकतंत्र की जीत हुई
SIR Row: तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट के SIR फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया। कहा, हम प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। फैसला ऐतिहासिक है, भाजपा और चुनाव आयोग को मिला जवाब।
- Written By: अर्पित शुक्ला
तेजस्वी यादव (Image- Social Media)
Tejashwi Yadav News: SIR पर सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक फैसले को राजद नेता तेजस्वी यादव ने लोकतंत्र की जीत बताया और सुप्रीम कोर्ट को इसके लिए धन्यवाद दिया। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार बंद, सड़क पर, सदन में तथा सुप्रीम कोर्ट हर जगह लड़ाई लड़ी। RJD नेता ने आगे कहा कि हम लोगों ने जो मांग की उस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि हम लोग SIR का विरोध नहीं कर रहे थे बल्कि इसकी प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। आज दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
तेजस्वी यादव ने आधार को जोड़ने के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भाजपा और चुनाव आयोग दोनों को जवाब मिला है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है और अमित शाह इस लोकतंत्र को खत्म करना चाहते थे। उनको जवाब मिल गया है और हम इस जननी से लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देंगे।
क्या कहा तेजस्वी यादव ने?
मीडिया से बात करते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “SIR को लेकर हम सभी विपक्षी दलों ने संसद से लेकर विधानसभा, सड़क तक या किसी भी मंच पर लड़ाई लड़ने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी। आज सुप्रीम कोर्ट में बहस के बाद जो अंतरिम फैसला दिया है, हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र की जीत हुई है”।
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सुप्रीम कोर्ट ने हमारी मांगों पर मुहर लगाया
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि “SIR की प्रक्रिया को लेकर हमारी जो मांगें रही हैं, आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी उन मांगों पर मुहर लगाने का काम किया है, हम शुरूआत से ही SIR का विरोध नहीं कर रहे थे बल्कि उसकी प्रक्रिया और जिस जानकारी को चुनाव आयोग छिपाने का काम कर रहा था, उसे लेकर हमारा विरोध था। आदेश दिया गया है कि आधार कार्ड को मान्य किया जाएगा, दूसरा जिन 65 लाख मतदाताओं का नाम काटा गया है उनके नाम की सूची को कारण बताते हुए बूथ स्तर पर लगाया जाएगा, तीसरा विज्ञापन जारी करके लोगों को इस बारे में बताया भी जाएगा।”
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (ECI) से पूछा कि क्या उसके लिए लापता मतदाताओं के नाम डिस्प्ले बोर्ड या अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर डालना संभव है। इस दौरान कोर्ट ने 65 लाख मतदाता जिनका नाम कट गया गया है, उनकी सूची वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया है।
