Supreme Court Of India ( Source- Social Media)
Supreme Decision On SIR: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कई दिनों से पूरे देश में अनेक समस्याएं देखने को मिल रही हैं। जैसे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से लेकर नाम में गड़बड़ी तक, अब इसी प्रक्रिया की रफ्तार बढ़ाने और करीब 80 लाख ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसे मामलों को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कोर्ट के आर्टिकल 142 के तहत अतिरिक्त न्यायिक तैनातियों की अनुमति दी है।
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ये फैसला दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के पास इस समय 220 एडीजे स्तर के जज उपलब्ध हैं। अगर एक जज भी दिन में 200 मामलों की सुनवाई करता है, फिर भी आपत्तियों को निपटाने में कम से कम 80 दिन का समय लगेगा।
जिसके चलते ही इस समस्या को दूर करने के लिए SC ने 3 साल के अनुभव वाले सिविल जजों को नियुक्ति का आदेश दिया है। इस आदेश के चलते ही अब झारखंड और ओडिशा से जजों को भर्ती किए जाने का फैसला लिया गया है। जिससे यह 80 लाख ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘अनमैप्ड’ कैटेगरी के मामलों को निपटाया जाए।
यह भी पढ़ें:ईरानियों के फोन पर ‘Wait and See’ मैसेज… ट्रंप की सैन्य तैयारियों के बीच भारतीयों को देश छोड़ने की सलाह
कोर्ट का आर्टिकल 142 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी लंबित मामले को सुलझाने के लिए विशेष शक्ति प्रदान करता है,जिसके तहत SC “पूर्ण न्याय” यानी Complete Justice को सुनिश्चित करने के लिए ऐसा आदेश दे सकता है, जो न्याय के लिए जरूरी हो।
इस फैसले को लेकर TMC के सांसद कल्याण बैनर्जी ने कहा कि अगर पड़ोसी राज्य अपने अधिकारी भेजता है। तो उनके पास एक ही भाषा ही समस्या हो सकती है। वंही दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओडिशा, झारखंड एक समय बंगाल का ही हिस्सा थे,तो वह भाषा को समझ सकते हैं। वंही दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने कहा किओडिशा, झारखंड एक समय बंगाल का ही हिस्सा थे,तो वह भाषा को समझ सकते हैं।