दही-चूड़ा भोज में मंच पर बात करते लालू प्रसाद और तेज प्रताप। इमेज-सोशल मीडिया
Lalu Yadav Family: मकर संक्रांति पर बिहार की राजधानी पटना में तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में राजनीति से ज्यादा परिवार की बात होती नजर आई। सात महीने बाद तेज प्रताप के घर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पहुंचे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे बेटे तेज प्रताप से नाराज नहीं हैं। उनका आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहेगा। लालू प्रसाद यादव के इस बयान को तेज प्रताप की राजनीतिक और पारिवारिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा।
लालू यादव ने दही-चूड़ा भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब दूरी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ रहेगा। लालू प्रसाद यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि तेज प्रताप पार्टी और परिवार से अलग-थलग हैं।
तेज प्रताप के भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर लालू प्रसाद यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बेटे को हमेशा उनका आशीर्वाद मिलेगा। वह जहां भी रहेगा, खुश और सफल रहे, यही उनकी कामना है। राजद सुप्रीमो के इस जवाब को सियासी संकेतों से ज्यादा भावनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा, जिससे साफ होता है कि परिवार के स्तर पर रिश्तों में नरमी आई है।
#WATCH पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव के आवास पर मकर संक्रांति समारोह में शामिल हुए।#MakarSankranti2026 pic.twitter.com/n7xcXYlAcG — ANI_HindiNews (@AHindinews) January 14, 2026
इस दही-चूड़ा भोज में राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, साधु यादव, प्रभुनाथ यादव, चेतन आनंद की उपस्थिति ने इस आयोजन को और खास बनाया। विशेषकर साधु यादव की मौजूदगी चर्चा में रही, क्योंकि अतीत में उनके और तेज प्रताप के रिश्तों में तल्खी रही है। अब एक मंच पर नजर आना सियासी गलियारों में नए संकेत दे रहा। वैसे, इस आयोजन में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी नहीं दिखे। यह चर्चा का विषय रहा।
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राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भले सभी रिश्ते एक साथ सामान्य न हुए हों, लेकिन लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने यह संदेश जरूर दिया कि परिवार को जोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं। तेज प्रताप यादव ने कहा कि दही-चूड़ा भोज उनकी ओर से परंपरा और रिश्तों को निभाने का प्रयास है। वे सभी बड़े नेताओं और परिवारजनों का सम्मान करते हैं और यही उनकी राजनीति की पहचान है। कुल मिलाकर तेज प्रताप के आवास पर हुआ यह दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक पर्व आयोजन नहीं, बल्कि लालू यादव के आशीर्वाद के साथ रिश्तों में आई गर्मजोशी और सियासी संकेतों का केंद्र बन गया।