तेज प्रताप यादव पर कसता शिकंजा! मर्डर अटेम्प्ट समेत BNS की 12 धाराओं में फंसे, क्या अब होगी उम्रकैद?

Tej Pratap Yadav: बिहार बंद हिंसा मामले में तेज प्रताप यादव पर BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन पर 12 धाराओं में आरोप लगाए गए है।
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तेज प्रताप यादव (सौजन्य-IANS)
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Tej Pratap Yadav Custody: बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा के मामले में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना पुलिस ने तेज प्रताप खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उन पर धारा 109 है, जो हत्या की कोशिश भी लगाई गई है।

अगर अदालत में यह आरोप साबित होता है तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। यदि गंभीर चोट साबित हो जाती है तो उम्रकैद तक भी सजा सुनाई जा सकती है। शनिवार की शाम पटना के एक शॉपिंग मॉल से तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिया गया था। रविवार को पटना की एक अदालत ने तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, उन्हें बेऊर सेंट्रल जेल में रखा गया।

गांधी मैदान हिंसा में पुलिसकर्मी घायल

पुलिस के मुताबिक तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी है। पटना में प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस झड़प में पथराव और हिंसा की घटनाओं में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। नीट पेपर लीक विवाद में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर हुई हिंसा में गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा, टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

इस मामले के संबंध में गांधी मैदान पुलिस स्टेशन कांड संख्या 400/26 दर्ज किया गया है, जिसमें तेज प्रताप यादव और अन्य को नामजद किया गया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनों का इस्तेमाल किया गया है।

तेज प्रताप यादव पर लगी धाराएं

एफआईआर में सबसे गंभीर आरोप BNS की धारा 109 (हत्या की कोशिश) के तहत लगाया गया है। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान किसी की जान जा सकती थी। अगर आरोप सही साबित हुआ तो तेज प्रताप को 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है या फिर गंभीर चोट पहुंचना साबित हुआ तो उम्रकैद की सजा हो सकती है।

इसके अलावा, तेज प्रताप यादव के खिलाफ BNS के तहत धारा 132 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), धारा 293 (सार्वजनिक जगह पर अश्लील हरकतें या शब्द), धारा 49 (उकसाना), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), धारा 251 (दंगा करना), धारा 297 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना), धारा 223 (कानूनी आदेश न मानना), धारा 197(2) (गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होना), धारा 191(3) (हथियार लेकर दंगा करना), धारा 190 (गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने का आम मकसद), और धारा 196 (अलग-अलग ग्रुप के बीच दुश्मनी बढ़ाना) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

प्रॉपर्टी डैमेज के लगे आरोप

इसके अलावा, प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 1984 की धारा 3 और 4 को भी FIR में शामिल किया गया है। ये धाराएं पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों पर लागू होती हैं।

जनशक्ति जनता दल के नेशनल प्रेसिडेंट तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिए जाने पर वकील जगन्नाथ सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेट के कहने पर ही हमें अरेस्ट मेमो दिया गया। हमें FIR की कॉपी भी नहीं दी गई है। जो मुख्य धारा लगाई गई है वह सेक्शन 109 है, जबकि पहले यह सेक्शन 307 (हत्या की कोशिश) थी। उनके वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा है कि सोमवार को तेज प्रताप की बेल के लिए याचिका लगाई जाएगी।

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