खेसारी लाल यादव: भोजपुरी सिनेमा से मिली लोकप्रियता को राजनीति में भुनाने की कोशिश, क्या हो पाएगी सफल
Khesari Lal yadav: शत्रुघ्न कुमार यादव को लोग खेसारी लाल यादव के नाम से जानते हैं। इनका का जन्म 15 मार्च 1986 को हुआ। वे भोजपुरी सिनेमा के प्रसिद्ध गायक, अभिनेता, नर्तक और मॉडल हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
खेसारी लाल यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bihar Assembly Election 2025: खेसारी लाल यादव के नाम से जानते हैं प्रसिद्ध गायक, अभिनेता, नर्तक और मॉडल हैं। उनकी पहली सफलता एल्बम “माल भेटाई मेला” से मिली और 2012 में फिल्म “साजन चले ससुराल” ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया।
खेसारी लाल यादव ने अपने करियर की शुरुआत लोक गायक और नृतक के रूप में की। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें लिट्टी-चोखा बेचकर पैसे इकट्ठा करने पड़े। बाद में उन्होंने भोजपुरी एल्बमों में गाना शुरू किया और “पियवा गए रे हमर सऊदी रे भौजी”, “सैयां अरब गइले न” जैसे हिट गीतों से लोकप्रियता हासिल की।
फिल्मी सफर और स्टारडम
2012 में रिलीज हुई “साजन चले ससुराल” ने खेसारी को रातों-रात भोजपुरी फिल्मों का सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने दिनेश लाल यादव जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उनकी मेहनत और प्रतिभा की सराहना संत कबीर नगर के उनके गांव में भी हुई।
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राजनीति में नई पारी की शुरुआत
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खेसारी लाल यादव ने छपरा विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “मैं कोई परंपरागत नेता नहीं हूं, मैं जनता जनार्दन का बेटा हूं, खेत-खलिहान का लाल हूं”।
त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाया रोमांच
छपरा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है:
1-खेसारी लाल यादव (आरजेडी)
2-छोटी कुमारी (बीजेपी)
3- राखी गुप्ता (निर्दलीय, पूर्व मेयर)
बीजेपी से टिकट कटने के बाद राखी गुप्ता ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिससे वैश्य वोट बैंक में बंटवारा होने की संभावना है। इसका सीधा लाभ यादव समुदाय के उम्मीदवार खेसारी लाल को मिल सकता है।
छपरा का बदलता समीकरण
पहले यादव और मुस्लिम वोट बैंक (लगभग 35%) निर्णायक भूमिका में थे। लेकिन अब वैश्य मतदाता (लगभग 30%) और राजपूत वोट मिलकर चुनावी हवा तय कर रहे हैं। पिछले तीन चुनावों में बीजेपी को वैश्य मतदाताओं का समर्थन मिला, लेकिन इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
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प्रचार में जुबानी जंग
बीजेपी ने खेसारी के खिलाफ प्रचार के लिए दिनेश लाल यादव “निरहुआ” को मैदान में उतारा। निरहुआ ने खेसारी को “यदमुल्ला” कहकर निशाना बनाया, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया।
