डेहरी विधानसभा सीट: राजद और लोजपा (रामविलास) के बीच कांटे की टक्कर, किस ओर घूमेगी घड़ी की सुई?
Bihar Assembly Elections: डेहरी विधानसभा सीट पर इस बार आरजेडी और लोजपा (रामविलास) के बीच सीधी भिड़ंत है। पिछले चुनाव में जीत का अंतर मात्र 464 वोट रहा था।
- Written By: अमन उपाध्याय
डेहरी विधानसभा सीट:(कॉन्सेप्ट फोटो)
Dehri Assembly Constituency: बिहार की राजनीति में अपनी खास जगह रखने वाली डेहरी विधानसभा सीट (Dehri Assembly Seat) रोहतास जिले में स्थित है और यह काराकाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। अपनी औद्योगिक और ऐतिहासिक पहचान के अलावा, यह सीट हमेशा से एक रोचक राजनीतिक रणभूमि रही है। इस बार, मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (Ramvilas)] के बीच दिख रहा है।
चुनावी समीकरण
डेहरी विधानसभा क्षेत्र में इस बार 10 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर है, लेकिन असली टक्कर दो प्रमुख दलों के बीच ही मानी जा रही है:
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD): पार्टी ने यहाँ से गुड्डू चंद्रवंशी को अपना प्रत्याशी बनाया है। राजद 2020 के पिछले चुनाव में यहाँ से जीत चुकी है।
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (Ramvilas)]: एनडीए गठबंधन की सहयोगी के रूप में चिराग पासवान की पार्टी ने राजीव रंजन सिंह को टिकट दिया है, जो चुनावी मैदान में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
- अन्य दलों की स्थिति: इनके अलावा, जन सुराज पार्टी से प्रदीप लल्लन भी मैदान में हैं, जो मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में, राजद के फतेह बहादुर कुशवाहा ने भाजपा के सत्यनारायण सिंह को बेहद कम वोटों के अंतर (464 वोट) से हराया था, जो दर्शाता है कि यहाँ मुकाबला हमेशा कांटे का रहा है।
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डेहरी विधानसभा का रोचक इतिहास
डेहरी विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास 1951 में अस्तित्व में आने के बाद से ही काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
शुरुआती दौर: समाजवादियों का दबदबा (1951-1962)
दिलचस्प बात यह है कि जब बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस का वर्चस्व था, डेहरी की जनता ने शुरुआती चुनावों में समाजवादी उम्मीदवारों को अपना प्रतिनिधि चुना। पहले विधायक सोशलिस्ट पार्टी के बसावन सिंह थे।
कांग्रेस का युग (1962-1985)
कांग्रेस को पहली जीत तीसरे चुनाव (1962) में मिली और इसके बाद पार्टी ने लगातार 4 बार जीत हासिल की। कांग्रेस को आखिरी बार 1985 में सफलता मिली थी।
जनता दल से निर्दलीय तक की यात्रा
1985 के बाद, यहाँ की राजनीति जनता दल, राजद (RJD) और भाजपा (BJP) के इर्द-गिर्द घूमती रही। यहाँ आरजेडी के मोहम्मद इलियास हुसैन का लम्बे समय तक दबदबा रहा, जिन्होंने अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर कुल 6 बार यह सीट जीती। हालांकि, अक्टूबर 2005 और 2010 के चुनाव में डेहरी ने निर्दलीय उम्मीदवारों को भी मौका दिया।
उपचुनाव और भाजपा की एंट्री
2019 के उपचुनाव में भाजपा की पहली बार एंट्री हुई जब सत्यनारायण सिंह ने जीत हासिल की। वहीं, जदयू (JDU) को इस सीट पर अभी तक जीत नहीं मिली है।
डेहरी का भौगोलिक और सामाजिक स्थिति
डेहरी विधानसभा क्षेत्र में 9 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। 2020 के आंकड़ों के अनुसार, यहाँ 2.94 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। यहाँ के मतदाताओं में ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के वोटर शामिल हैं, जिनमें से ग्रामीण मतदाताओं का प्रतिशत लगभग 65% है।
यह सीट सोन नदी के किनारे स्थित है और यहाँ की नहर प्रणाली किसानों के लिए जीवनरेखा है। स्थानीय मुद्दों में सिंचाई, औद्योगिक विकास (डालमियानगर का पुराना औद्योगिक केंद्र), और रोजगार प्रमुख होते हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
डेहरी के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल
राजनीति के अलावा, डेहरी-ऑन-सोन अपने ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है:
- धूप घड़ी (Sun Dial): डेहरी के एनिकट रोड पर 1871 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित यह एकमात्र घड़ी है, जो सूरज की रोशनी से समय दिखाती है। यह एक पत्थर के प्लेटफॉर्म पर लगाई गई है और इसमें हिंदी व रोमन अंक हैं।
- इंद्रपुरी डैम: डेहरी-ऑन-सोन शहर के सबसे आकर्षक पर्यटन क्षेत्रों में से एक, यह शानदार नजारा देखने के लिए प्रसिद्ध है।
- सोन नहर प्रणाली केंद्र: यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी नहर प्रणालियों में से एक का केंद्र है।
- नेहरू सेतु रेलवे पुल: एक समय में यह पुल डेहरी की शोभा बढ़ाता था।
- झारखंडी महादेव मंदिर: यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच आस्था का एक प्रमुख केंद्र है।
- रोहतासगढ़ किला और अकबरपुर: ऐतिहासिक महत्व के ये स्थल भी डेहरी से कुछ दूरी पर स्थित हैं।
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किस करवट बैठेगा ऊंट
डेहरी विधानसभा सीट पर हर चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिलती है, जहाँ जीत का अंतर अक्सर काफी कम रहा है। इस बार, राजद के गुड्डू चंद्रवंशी और लोजपा (रामविलास) के राजीव रंजन सिंह के बीच का सीधा मुकाबला न केवल दोनों पार्टियों के लिए बल्कि रोहतास जिले की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहाँ के मतदाता स्थानीय समीकरणों, जातिगत गणित और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि पर विशेष ध्यान देते हैं। परिणाम चाहे जो भी हो, यह तय है कि डेहरी का यह चुनावी मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।
