बिहार की सड़कों पर जुटेंगे हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता (कॉन्सेप्ट फोटो- सोशल मीडिया)
Bihar Congress Meeting EVM Tampering Claim: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। पार्टी ने अपनी हार का ठीकरा ‘वोट चोरी’ पर फोड़ते हुए एनडीए सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 1 दिसंबर को पटना के सदाकत आश्रम में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में हार के कारणों से ज्यादा चर्चा इस बात पर होगी कि कैसे एनडीए को घेरा जाए और जनता के बीच यह संदेश दिया जाए कि लोकतंत्र की हत्या हुई है।
यह चुनाव नतीजों के बाद प्रदेश कांग्रेस की पहली इतनी बड़ी बैठक होने जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश राम की अगुवाई में होने वाली इस मीटिंग में बिहार के सभी 38 जिलों के अध्यक्षों, कार्यकारी अध्यक्षों और विभिन्न मोर्चा संगठनों के प्रमुखों को हर हाल में मौजूद रहने का फरमान सुनाया गया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो माहौल काफी गर्म रहने वाला है। कांग्रेस का मानना है कि कई सीटों पर ईवीएम में खेल हुआ है और गिनती के दौरान भी संदिग्ध गड़बड़ियां की गई हैं, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी है।
कांग्रेस का प्लान सिर्फ पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी। आगामी 14 दिसंबर को दिल्ली में ‘वोट चोरी के खिलाफ राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन’ होने वाला है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी भी शामिल होंगे। पटना की बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार से हजारों कार्यकर्ताओं को दिल्ली ले जाने की रणनीति बनाना है। बसों की व्यवस्था कैसे होगी और भीड़ कैसे जुटाई जाएगी, इस पर डॉ. राजेश राम कार्यकर्ताओं को खास निर्देश देंगे। राहुल गांधी ने चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था, हालांकि तब जनता ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और पार्टी 62 में से सिर्फ 6 सीटें ही जीत पाई, लेकिन अब पार्टी इसे एक बड़े आंदोलन का रूप देना चाहती है।
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एक तरफ जहां कांग्रेस वोट चोरी का शोर मचा रही है, वहीं दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों की हवा निकाल दी है। आयोग ने साफ कहा है कि बिहार में विपक्षी दल धांधली के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। आयोग ने एक बयान में स्पष्ट किया कि चुनाव हारने वाले किसी भी उम्मीदवार ने ईवीएम के माइक्रोकंट्रोलर की जांच के लिए आवेदन तक नहीं किया। आयोग ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया इतनी पारदर्शी थी कि 243 सीटों में से किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि किसी दल ने इसका अनुरोध ही नहीं किया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि आयोग के इस बयान के बाद कांग्रेस अपने आंदोलन को कैसे धार देती है।