‘बबुआ’ पड़ा भारी, झुक गए चाचा! पशुपति पारस ने चिराग से हाथ मिलाने के दिए संकेत; CM नीतीश पर भी तोड़ी चुप्पी
Bihar Politics: लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी में राजनीतिक विरासत को लेकर टूट हो गई थी। बेटे चिराग और भाई पशुपति पारस ने अलग-अलग गुट बना लिए थे।
- Written By: मनोज आर्या
चिराग पासवान और पशुपति पारस, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Chirag Paswan vs Pashupati Paras: राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस अपने भतीजे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के सामने पस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने भतीजे से अदावत को साइड में रखते हुए पार्टी और परिवार को एक करने की बात कह दी है। पारस ने यह भी कहा कि अगर चिराग बिहार के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें खुशी होगी। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में अपने चाचा पारस के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने गुरुवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान लोजपा के दोनों गुटों को एक करने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘देर से आए लेकिन दुरुस्त आए, समर्थक चाहते हैं कि पार्टी और परिवार एक हो जाए।” सियासी गलियारों में इस पर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि चाचा पारस ने अपनी पार्टी रालोजपा और चिराग की पार्टी लोजपा (रामविलास) के विलय का अनौपचारिक प्रस्ताव दे दिया है।
रामविलास के निधन के बाद चाचा-भतीजा में झगड़ा
दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रहे रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी में राजनीतिक विरासत को लेकर टूट हो गई थी। रामविलास के बेटे चिराग और भाई पशुपति पारस ने अलग-अलग गुट बना लिए थे। उस समय लोजपा के कुल 6 सांसद थे। चिराग को छोड़ सभी सांसद पारस के समर्थन में आ गए थे और पशुपति पारस अपने भाई रामविलास की जगह केंद्र में मंत्री बने थे। चिराग एनडीए से अलग हो गए थे।
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लोकसभा चुनाव से पहले NDA में चिराग की वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हुई। पारस ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। एनडीए में पारस के गुट वाली पार्टी रालोजपा को साइडलाइन कर दिया गया। पिछले लोकसभा चुनाव में चिराग के गुट वाली लोजपा (रामविलास) को 5 सीटें दी गईं, जबकि रालोजपा खाली हाथ रही।
बाद में पशुपति पारस ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव रालोजपा ने गठबंधन से अलग रहकर लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब पारस अपनी पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में लगे हैं। इस बीच उन्होंने इच्छा जाहिर कर दी है कि लोजपा के दोनों गुट वापस एक हो जाएं। हालांकि, इस पर चिराग पासवान की क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखने वाली बात होगी।
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भतीजे चिराग ने छुए थे चाचा के पैर
पिछले सप्ताह खगड़िया जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पशुपति पारस और चिराग पासवान का आमना-सामना हुआ था। उस समय चिराग ने अपने चाचा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। दोनों के बीच कुछ पल के लिए बातचीत भी हुई थी। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि चाचा-भतीजे के रिश्तों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है।
