छठ के बाद प्रवासी मतदाताओं को रोकने का BJP का ‘मास्टर प्लान’, जानें पार्टी टेंशन में क्यों है?
Bihar Election 2025: छठ पूजा के बाद बिहार में चुनाव होने के कारण भाजपा को 48 लाख से अधिक प्रवासी मतदाताओं के जाने का डर सता रहा है। पार्टी ने इन्हें रोकने के लिए बूथ-स्तरीय अभियान शुरू किया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो- सोशल मीडिया
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरण 6 और 11 नवंबर को होने हैं, जबकि छठ 28 अक्टूबर को समाप्त होगी। इसके बाद प्रवासी मतदाताओं को कैसे रोका जाए, इस बात को लेकर भाजपा की टेंशन बढ़ गई है। इसी चुनौती के मद्देनजर, पार्टी ने इन लोगों को वोटिंग तक रोकने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है।
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें छठ पूजा के ठीक बाद पड़ रही हैं। छठ 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर तक चलेगी, जबकि दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवंबर को संपन्न होगा। आमतौर पर, 48 लाख से अधिक प्रवासी बिहारवासी छठ मनाकर तुरंत अपनी कर्मभूमि की ओर निकल जाते हैं। यह देखते हुए, भाजपा को यह चिंता सता रही है कि इन लाखों मतदाताओं को मतदान होने तक कैसे रोका जाए।
48 लाख से ज्यादा प्रवासी छठ पूजा मनाने बिहार आएंगे
एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 48 लाख से ज्यादा प्रवासी बिहार छठ पूजा मनाने के लिए अपने प्रदेश का रुख करते हैं। इसमें से 45.78 लाख घरेलू प्रवासी और 2.17 लाख विदेश में काम करने वाले बिहार के लोग शामिल हैं। यह सभी लोग हर साल छठ का त्योहार मनाने के बाद अपने-अपने कर्मभूमि की ओर रवाना हो जाते हैं और आमतौर पर छठ पूजा के बाद बिहार में रुकने से गुरेज करते हैं।
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प्रवासी मतदाताओं को कैसे रोकेगी भाजपा?
प्रवासी मतदाताओं की इस अहमियत और उनके जल्द चले जाने की प्रवृत्ति को देखते हुए, भाजपा ने इन्हें रोकने का पूरा प्लान बनाया है। भाजपा के एक सूत्र के मुताबिक, पार्टी की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों में एक विशेष बूथ-स्तरीय अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रवासी लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे प्रवासी लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि वो मतदान समाप्त होने तक यहीं रहें और उसके बाद ही कहीं बाहर जाएं।
भाजपा के मुताबिक, पार्टी इस बात को भलीभांति समझती है कि छठ के बाद किसी भी आम बिहारी के लिए अपने प्रदेश में रुकना मुश्किल होता है। उन्हें अक्सर नौकरी गंवाने का डर रहता है। लेकिन, पार्टी ऐसे सभी लोगों के बीच में जाकर उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रही है। इसके अलावा, पार्टी कार्यकर्ता उन्हें मतदान का महत्व भी समझा रहे हैं। वे उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का क्या मूल्य होता है।
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सबसे ज्यादा प्रवासी मतदाता इन जिलों से
जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में प्रवासी लोगों की अहमियत को देखते हुए बूथ कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों तक को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि प्रवासी मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या कुछ प्रमुख जिलों में केंद्रित है। इन जिलों में पूर्वी चंपारण (6.14 लाख), पटना (5.68 लाख), सीवान (5.48 लाख), मुजफ्फरपुर (4.31 लाख) और दरभंगा (4.3 लाख) शामिल हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी उच्च प्रवासी सांद्रता वाले जिले पहले चरण के मतदान के तहत कवर कर दिए जाएंगे।
