बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nitish Kumar Rajya Sabha MP Oath: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद राज्य विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है। इसी के साथ ही अब वह बिहार की राजनीति की बागडोर छोड़कर दिल्ली की राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। बिहार बीजेपी नेता संजय सरावगी ने रविवार को पुष्टि की कि मौजूदा मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के प्रमुख नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में औपचारिक रूप से शपथ लेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद सरावगी ने नए मंत्रिमंडल के गठन के लिए रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें वरिष्ठ पार्टी नेतृत्व और गठबंधन सहयोगियों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, हमारी भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए एक साथ बैठकर इस पर निर्णय लेंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 5 मार्च को अपने इस फैसले की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि यह उनका निजी फैसला है। संवैधानिक नियम के अनुसार, अगर वे किसी अन्य पद के लिए शपथ लेते हैं, तो उन्हें वर्तमान पद से इस्तीफा देना पड़ता है।
नीतीश कुमार के बाद राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कवायद तेज हो गई है। बीजेपी के एक दर्जन संभावित नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी उन्हीं की पसंद का होना चाहिए। जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नए मुख्यमंत्री को नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना होगा और उनकी राजनीति के तौर-तरीकों का पालन करना होगा। हम सरकार के सामाजिक गठबंधन को बिगड़ने नहीं देना चाहते। हम ऐसा नेता भी चाहते हैं जो निशांत कुमार का विश्वास जीत सके, जो अब राज्य की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं।
जेडीयू के एक नेता ने कहा कि बिहार मध्य प्रदेश या राजस्थान नहीं है, जहां बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों के चयन से सबको चौंका दिया था। बिहार में समाजवादी विचारधारा की गहरी जड़ें हैं। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे एनडीए सहयोगियों को पूरी तरह से विश्वास में लेना चाहिए। बीजेपी को यह नहीं भूलना चाहिए कि हम (जेडी-यू) 85 विधायकों की पार्टी हैं, जो भाजपा के 89 विधायकों से सिर्फ चार कम हैं।
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बिहार में सियासत काफी अस्थिर नजर आ रही है क्योंकि जेडीयू के चीफ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) राज्य के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। अब वह जल्द ही राज्यसभा सदस्य के रूप में इस्तीफा लेंगे। इसके बावजूद ये स्पष्ट नहीं है कि उनका उत्तराधिकारी कौन और कब होगा? नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने वाली है लेकिन अभी तक ये तय नहीं है, कि आखिर वो कौन होगा।