Bihar New CM: बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी के साथ दो डिप्टी सीएम भी लेंगे शपथ
Samrat Choudhary Oath Ceremony: बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। सम्राट चौधरी पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर प्रदेश की कमान संभालने जा रहे हैं। दो DyCM भी बनेंगे
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सम्राट चौधरी (डिजाइन फोटो)
Bihar Cabinet Expansion: बिहार के सियासी गलियारों में आज एक ऐसी सुबह हुई है जिसकी प्रतीक्षा भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को दशकों से थी। 14 अप्रैल की शाम से ही प्रशासनिक अमला जिस तरह सक्रिय हुआ, उसने साफ कर दिया था कि बिहार की सत्ता का नया केंद्र अब लोकभवन बनने जा रहा है।
आज सुबह 11 बजे का वह समय बिहार के राजनीतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है, जब सम्राट चौधरी सीएम पद की शपथ लेंगे । यह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं है, बल्कि बिहार में उस दो दशक पुराने दौर के समापन की औपचारिक घोषणा भी है, जिसमें नीतीश कुमार धुरी बने हुए थे। भाजपा, जो अब तक गठबंधन की राजनीति में हमेशा सहयोगी की भूमिका में रही, आज पहली बार ड्राइविंग सीट पर बैठने जा रही है।
मजह नौ साल के सफर में मिली मुख्यमंत्री की कुर्सी
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत तीन दशक पहले की थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका नाता महज नौ साल पुराना है। इन नौ सालों में उन्होंने अपनी संगठन क्षमता और मुखर नेतृत्व के दम पर पार्टी के भीतर अपनी एक ऐसी जगह बनाई कि आज वे निर्विवाद रूप से भाजपा विधायक दल और एनडीए गठबंधन के नेता चुन लिए गए हैं।
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सम्राट चौधरी के राजनीतिक अनुभव की बात करें तो वे पहली बार 26 साल पहले विधायक चुने गए थे। उनकी प्रशासनिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 2024 में बिहार के उपमुख्यमंत्री बने और फिर 2025 की प्रचंड जीत के बाद दोबारा उसी जिम्मेदारी को संभाला। लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। आज वे उस पद की शपथ ले रहे हैं जहां अब तक केवल गैर-भाजपा दलों का ही कब्जा रहा था।
पटना लोकभवन में सजी शपथ ग्रहण की भव्य महफिल
इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए पटना के लोकभवन में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं। बिहार सरकार ने इस समारोह की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर पूरी ताकत झोंक दी है। विशेष रूप से 20 वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है जो लायजन ऑफिसर के तौर पर काम करेंगे। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी न केवल स्थानीय व्यवस्था देखना है, बल्कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की मेजबानी करना भी है।
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सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार ये सभी अधिकारी 14 अप्रैल से ही अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं ताकि समारोह में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। लोकभवन के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है कि परिंदा भी पर न मार सके। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और वीआईपी मूवमेंट के लिए विशेष रूट तैयार किए गए हैं। यह प्रशासनिक मुस्तैदी दर्शाती है कि नई सरकार अपने पहले ही दिन से अनुशासन और प्रबंधन का संदेश देना चाहती है।
बंगाल चुनाव के बाद होगा बिहार कैबिनेट का बड़ा विस्तार
आज होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह की एक खास बात यह भी है कि इसमें केवल तीन लोग ही गोपनीयता की शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और दो उपमुख्यमंत्रियों के साथ ही फिलहाल सरकार की शुरुआत होगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार अभी नहीं किया जाएगा। इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह बताई जा रही है। माना जा रहा है कि बिहार में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और नए चेहरों को शामिल करने का काम 5 मई के बाद ही किया जाएगा।
इसके पीछे का मुख्य कारण पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम हैं। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि बंगाल चुनाव के नतीजों के आधार पर बिहार में भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को दोबारा संतुलित किया जाए। इस देरी के बावजूद प्रशासन के कामकाज पर कोई असर न पड़े, इसके लिए सम्राट चौधरी ने पहले ही अधिकारियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं।
