Bihar Politics: हिंदुत्व की पिच पर बिहार में सियासी खेल! आखिर महागठबंधन में क्यों बढ़ी टेंशन? ‘बाबा’ पर हो रहा बवाल
Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हिंदू धर्मगुरुओं के दौरे से सियासी पारा गर्म, बाबा बागेश्वर, मोहन भागवत और श्री श्री रविशंकर के बयान चर्चा में।
- Written By: अर्पित शुक्ला
Bihar Politics: हिंदुत्व की पिच पर बिहार में सियासी खेल! आखिर महागठबंधन में क्यों बढ़ी टेंशन? 'बाबा' पर हो रहा बवाल
नवभारत डेस्क: कहते हैं सियासत में संयोग कुछ भी नहीं होता, बल्कि प्रयोग होता है और लक्ष्य सत्ता में आना या फिर बने रहना ही होता है। बिहार की राजनीति तो इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण है। यहां समय-समय पर नए राजनीतिक समीकरण बनने बिगड़ने के कई उदाहरण हैं। वर्तमान में अब जब बिहार विधानसभा चुनाव के लगभग 6 महीने ही शेष रह गए हैं तो अभी से राजनीतिक सरगर्मी के साथ बिहार में अनेको तरह की गहगहमी देखने को मिल रही है। एक ओर विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है, तो इसी बीच बिहार में हिंदू धर्मगुरुओं के एक के बाद एक लगातार दौरों ने सियासी पारा को गर्म कर दिया है।
हिंदुत्व के प्रतीक धार्मिक गुरुओं के बिहार दौरे को लेकर राजनीति भी गर्म है। दरअसल, बिहार में चुनावी साल में हिंदुत्व के तीन बड़े चेहरे, बागेश्वर बाबा आचार्य धीरेंद्र शास्त्री, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और श्री श्री पंडित रविशंकर एक साथ इन दिनों बिहार में हैं। जाहिर तौर पर विपक्षी महागठबंधन के नेताओं ने इसको राजनीति से प्रेरित बताया है, वहीं बीजेपी इसमें राजनीति नहीं देख रही है। इसमें जेडीयू के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को राजनीति के जानकार भी अपने नजरिए से देख रहे हैं। मगर आइए जानते हैं कि पहले हो क्या रहा है।
लालू के गढ़ में बागेशवर बाबा
अब यह गौर करने वाली बात है कि बाबा बागेश्वर गोपालगंज के दौरे पर हैं जो परंपरागत रूप से लालू प्रसाद यादव का गढ़ कहा जाता है। हालांकि, पिछले चुनावों में इन क्षेत्रों में बीजेपी और जदयू का दबदबा रहा है, लेकिन अभी भी इसको गढ़ लालू का ही कहा जाता है। वो वहां हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, हनुमंत कथा और दिव्य दरबार का आयोजन कर रहे हैं। उनको सुनने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुट रही है और वो ‘बिहार में बहार’ आने तक की बात भी अपनी सभा में कह रहे हैं। निश्चित तौर पर ‘बिहार में बहार’ आने की उनकी बात कहीं ना कहीं सीएम नीतीश कुमार के उस नारे से जोड़कर देखा जा रहा है जब 2015 में नारा था कि बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है… ।
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बिहार में बाबाओं का पड़ाव
गोपालगंज में हिंदू राष्ट्र की हुंकार भरते हुए धीरेंद्र शास्त्री के कुछ बयानों पर गौर करें तो आप देखेंगे कि उनका क्या ध्येय है और उनकी बातों के क्या अर्थ हैं। उन्होंने कहा कि देश रघुवर का है बाबर का नहीं… भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे… हिंदुओं को एक करेंगे… हिंदुओं को घटने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि संकट पर हिंदू कहां जाएंगे… हिंदू राष्ट्र की आवाज बिहार से। बाबा बागेश्वर के बयानों को सियासत के जानकार अपने नजरिये से पढ़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि महाकुंभ आयोजन में सनातन एकता की बात को खूब बढ़ाया गया। इसी को आगे बढ़ाते हुए धीरेद्र शास्त्री का पड़ाव बिहार बना है। अब जाहिर तौर पर जातियों में बुरी तरह से विभाजित बिहार के समाज को एकजुट करने में अगर थोड़ी भी सफलता बाबा को मिलेगी तो ये बीजेपी की राजनीति को ही फायदा पहुंचाएगी।
गजनवी के नाम से पॉलिटिकल पॉलराइजेशन
वहीं, श्री श्री रविशंकर भी इन दिनों बिहार के दौरे पर हैं और वो सत्संग और अध्यात्म की अलख जगा रहे हैं। पटना के गांधी मैदान में शुक्रवार (7 मार्च) से आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का भव्य सत्संग शुरू हुआ। इस दो दिवसीय सत्संग में ध्यान, योग तथा जीवन जीने की कला पर विशेष प्रवचन मुख्य आयोजन था। इसके साथ ही गुरु रविशंकर 1000 साल पुराने पवित्र शिवलिंग के साथ में बिहार पहुंचे हैं। जिसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित भी किया जा रहा है। खास बात ये है कि यह शिवलिंग वही है जिसे महमूद गजनवी ने 1026 ईस्वी में खंडित किया था। इसके आगे बड़ी बात ये कि पटना पहुंचने के बाद गुरुवार देर शाम श्री श्री रविशंकर ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की। जाहिर है इसको सियासत से भी जोड़ा जा रहा है।
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सियासी जमीन मजबूत कर रहे आरएसएस प्रमुख?
वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मुजफ्फरपुर को बेस बनाकर पांच दिनों के बिहार दौरे पर हैं और विभिन्न जिलों में संघ के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। सरसंघ चालक मोहन भागवत मुजफ्फरपुर दौरे के दौरान 7 मार्च की सुबह-सुबह आरडीएस (RDS) कॉलेज मैदान में शाखा लगाया, शाखा में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में व्यायाम तथा प्रैक्टिस लोग कर रहे हैं। वो आरएसएस कार्यालय में तमाम आरएसएस के सदस्यों के साथ बैठक करेंगे और फिर 8 मार्च को भी मोहन भागवत शाखा में शामिल होने के बाद बैठक की और फिर 9 मार्च को नागपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। सियासी जानकार कह रहे हैं कि सर संघ चालक मोहन भागवत भाजपा के वोट बेस को मजबूत बनाने की कवयद में लगे हुए हैं।
